sufi tadka
सोमवार, 12 नवंबर 2012
aa diwali ke din
दीवाली के दिन मिल जाये,
दीवाली को बिछुड़े मिलते,
मुकर्र होता सब उसके घर,
बेमौसम कब ये गुल खिलते। "रैना"
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