अपनी मस्ती में रहते है,
आशिक तो पीड़ा सहते है।
हम तुमसे जब से है बिछुड़े,
आंखों से दरिया बहते हैं।
अब सच कहने वालों पे तो,
गम के पर्वत ही ढहते है।
जो उसको है अच्छा लगता,
आओ कुछ ऐसा करते हैं।
"रैना" पागल हो जाये गा,
कहने वाले तो कहते हैं। ......"रैना"
आशिक तो पीड़ा सहते है।
हम तुमसे जब से है बिछुड़े,
आंखों से दरिया बहते हैं।
अब सच कहने वालों पे तो,
गम के पर्वत ही ढहते है।
जो उसको है अच्छा लगता,
आओ कुछ ऐसा करते हैं।
"रैना" पागल हो जाये गा,
कहने वाले तो कहते हैं। ......"रैना"
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