दोस्तों फिर लिख दी ग़ज़ल
क्या आप पसंद करेगे जी।
अपने घर तो गम रहते हैं,
पर मस्ती में हम रहते हैं।
हंसना मेरी फितरत यारो,
प्यासें नैना नम रहते हैं।
बीवी अक्सर झगड़ा करती,
अब हम घर में कम रहते हैं।
खाने पीने की बस सोचे,
चिन्ता में हरदम रहते हैं।
तुम तो मेरे दिल में बसते,
क्या उस दिल में हम रहते है।
रैना"को तो गहरा सदमा,
बिन तेरे बेदम रहते हैं। ..."रैना"
क्या आप पसंद करेगे जी।
अपने घर तो गम रहते हैं,
पर मस्ती में हम रहते हैं।
हंसना मेरी फितरत यारो,
प्यासें नैना नम रहते हैं।
बीवी अक्सर झगड़ा करती,
अब हम घर में कम रहते हैं।
खाने पीने की बस सोचे,
चिन्ता में हरदम रहते हैं।
तुम तो मेरे दिल में बसते,
क्या उस दिल में हम रहते है।
रैना"को तो गहरा सदमा,
बिन तेरे बेदम रहते हैं। ..."रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें