रचना पेशे खिदमत है जनाब
सारे वादें सच्चे निकले,
मेरे दोस्त अच्छे निकले।
शिकवा उनसे कैसे करते,
किस्मत में ही धक्के निकले।
बेशक उनको मिलती मन्जिल,
जो वादे के पक्के निकले।
बातों की ही कीमत लगती,
बिकते कम जो कच्चे निकले।
दोपहरी में डाका डाला,
शातिर डाकू बच्चे निकले।
देखो बदली सारी बस्ती,
"रैना"हक्के बक्के निकले। "रैना"
सारे वादें सच्चे निकले,
मेरे दोस्त अच्छे निकले।
शिकवा उनसे कैसे करते,
किस्मत में ही धक्के निकले।
बेशक उनको मिलती मन्जिल,
जो वादे के पक्के निकले।
बातों की ही कीमत लगती,
बिकते कम जो कच्चे निकले।
दोपहरी में डाका डाला,
शातिर डाकू बच्चे निकले।
देखो बदली सारी बस्ती,
"रैना"हक्के बक्के निकले। "रैना"
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