दोस्तों अपनी प्यारी ग़ज़ल
आप की खिदमत में पेश है,
तवाजो चाहू गा।
अब चली ऐसी हवा देखो,
यार करते हैं दगा देखो।
इश्क भी जाहिल हुआ यारों,
हुस्न की जालिम अदा देखो।
पूछते हैं फरिश्ते भी अब,
है कहां मिलती वफा देखो।
हैं दुखी इन्सान खुद से ही,
ढूंढता फिरता कजा देखो।
दर्द अपने ही तुझे देगे,
ये जमाने की अदा देखो।
बाद मुद्दत भी नशे में हैं,
रिन्द होते है फना देखो।
इश्क में हासिल जुदाई है,
मौत ही "रैना"सजा देखो। ....."रैना"
आप की खिदमत में पेश है,
तवाजो चाहू गा।
अब चली ऐसी हवा देखो,
यार करते हैं दगा देखो।
इश्क भी जाहिल हुआ यारों,
हुस्न की जालिम अदा देखो।
पूछते हैं फरिश्ते भी अब,
है कहां मिलती वफा देखो।
हैं दुखी इन्सान खुद से ही,
ढूंढता फिरता कजा देखो।
दर्द अपने ही तुझे देगे,
ये जमाने की अदा देखो।
बन्दगी में जब लगे दिल है,
जिन्दगी में तब मजा देखो।
बाद मुद्दत भी नशे में हैं,
रिन्द होते है फना देखो।
इश्क में हासिल जुदाई है,
मौत ही "रैना"सजा देखो। ....."रैना"
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