रविवार, 4 नवंबर 2012

khuj le use khoj le

मेरे यार के सजिदे में इक सूफी गीत

कोई कहता मस्जिद में बैठा,
कोई कहता बैठा मन्दिर में,
खोजने वालों ने है ये पाया,
वो बैठा है मनमन्दिर में।
खोज ले उसे खोज ले,
अपने अंदर खोज ले,
मौज ले फिर मौज ले,
अपने अंदर खोज ............
ऊपर आसमां नीचे धरती,
धरती नीचे पानी है,
पानी और हवा से ही,
चलती ये जिंदगानी है,
इन सब को बनाने वाली,
वो अदभुत इक शक्ति है,.
उस शक्ति के दम से ही,
सारी दुनिया चलती है।
खोज ले उसे खोज ले,
मौज ले फिर मौज ले,
उसे अपने अंदर ................"रैना"
सुप्रभात जी .....................good morning ji

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