दोस्तों के नाम इक ग़ज़ल
दीवाली की बातें चलती,
मेरे दिल में होली जलती।
मैं बिरहन की मारी दुखिया,
बैठी अब हाथों को मलती।
साजन से जो दुरी पनपी,
इसमें मेरी सारी गलती।
किस्मत ही जब धोखा देती,
फिर तो बिगड़ी बात न बनती।
दिल की धड़कन है बढ़ जाती,
आँखों से जब आँखें मिलती।
"रैना"दिन तो हो जाना है,
हिम्मत से मुश्किल भी कटती। "रैना"
दीवाली की बातें चलती,
मेरे दिल में होली जलती।
मैं बिरहन की मारी दुखिया,
बैठी अब हाथों को मलती।
साजन से जो दुरी पनपी,
इसमें मेरी सारी गलती।
किस्मत ही जब धोखा देती,
फिर तो बिगड़ी बात न बनती।
दिल की धड़कन है बढ़ जाती,
आँखों से जब आँखें मिलती।
"रैना"दिन तो हो जाना है,
हिम्मत से मुश्किल भी कटती। "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें