दोस्तों इक और ग़ज़ल मेरी किताब
" हर हाथ हवा देगा"से
बुझ जा शमा या तू जला दे मुझे,
कुछ तो वफा का ये सिला दे मुझे।
मैं तो ख़ुशी से जाम पी लू भला,
तू जहर ही चाहे पिला दे मुझे।
तेरी गली भी अब नही याद है,
तू घर तिरे का तो पता दे मुझे।
हसरत यही अब और जीना नही,
कर रहम खुद ही तू मिटा दे मुझे।
कटती न काली रात लम्बी लगे,
तू हम जुबां कोई मिला दे मुझे।
मन्जिल नही मिलती बता क्या करु,
अब रास्ता कोई दिखा दे मुझे।
"रैना" करे विनती मिरे ओ खुदा
अब तू किनारे से लगा दे मुझे। ..."रैना"
" हर हाथ हवा देगा"से
बुझ जा शमा या तू जला दे मुझे,
कुछ तो वफा का ये सिला दे मुझे।
मैं तो ख़ुशी से जाम पी लू भला,
तू जहर ही चाहे पिला दे मुझे।
तेरी गली भी अब नही याद है,
तू घर तिरे का तो पता दे मुझे।
हसरत यही अब और जीना नही,
कर रहम खुद ही तू मिटा दे मुझे।
कटती न काली रात लम्बी लगे,
तू हम जुबां कोई मिला दे मुझे।
मन्जिल नही मिलती बता क्या करु,
अब रास्ता कोई दिखा दे मुझे।
"रैना" करे विनती मिरे ओ खुदा
अब तू किनारे से लगा दे मुझे। ..."रैना"
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