शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

ग़ज़ल आप के वास्ते दोस्तों

अब जमाने की अदा यारों,
यार देता है दगा यारों।
तुम वफा की बात मत करना,
है सिला मिलता कजा यारों।
क्यों करे दोस्त वफा कोई,
अब वफा देती सजा यारों।
दर्द देता सोचता कम हैं,
शख्स कब देता दवा यारों।
तुम कभी सोचो अकेले में,
क्यों हुये वादे हवा यारों।
मौत ही अब तो इलाजे गम,
कब सुने गा वो खुदा यारों।
याद उसकी बावफा निकली,
जब मरे तब हो जुदा यारों।
मान"रैना"को मिले मन्जिल,
अब करो पूजा दुआ यारों। ......... "रैना"

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