दोस्तों आप के नाम इक ग़ज़ल
दिल से जब ये दिल मिलता है,
गुलशन में गुल तब खिलता है।
आशिक ही ये समझे जाने,
दिल का दिल से क्या रिश्ता है।
सच का व्यापारी गर्दिश में,,
झूठे का सब कुछ बिकता है।
सब ने सूरत फितरत बदली,
जो होता वो कब दिखता है।
"रैना"कुछ तो छोड़े जाता,
ये सूरज जब भी छिपता है। ....."रैना"
दिल से जब ये दिल मिलता है,
गुलशन में गुल तब खिलता है।
आशिक ही ये समझे जाने,
दिल का दिल से क्या रिश्ता है।
सच का व्यापारी गर्दिश में,,
झूठे का सब कुछ बिकता है।
सब ने सूरत फितरत बदली,
जो होता वो कब दिखता है।
"रैना"कुछ तो छोड़े जाता,
ये सूरज जब भी छिपता है। ....."रैना"
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