सिर पे कोई न उधारी हो,
यूं सुख सुविधा भी सारी हो।
मैं हाथ न फैलाऊ मौला,
चाहे पोक्ट कम भारी हो।
घर लड़के के बिन सूना है,
हसरत इक बेटी प्यारी हो।
अब तो अपना हाल बुरा है,
यूं दुश्मन ने न गुजारी हो।
"रैना"की ये विनती मालिक,
हम पे कृपा तुम्हारी हो। "रैना"
यूं सुख सुविधा भी सारी हो।
मैं हाथ न फैलाऊ मौला,
चाहे पोक्ट कम भारी हो।
घर लड़के के बिन सूना है,
हसरत इक बेटी प्यारी हो।
अब तो अपना हाल बुरा है,
यूं दुश्मन ने न गुजारी हो।
"रैना"की ये विनती मालिक,
हम पे कृपा तुम्हारी हो। "रैना"
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