दोस्तों ये ग़ज़ल मेरे दिल का टुकड़ा है,
देखते है आप को कैसा लगता है।
तुम इक दिन अर्जी मंजूर करो गे,
मिर बाद मुझे याद जरुर करो गे।
बेशक मुझको तो इतना भी पता है,
इक तुम ही मुझको मशहूर करो गे।
आँखों से तो हो जाये गे ओझल,
मुझको दिल से कैसे दूर करे गे।
तेरे दम से महफ़िल बानूर हुई,
लगता तुम बज्म को बेनूर करो गे।
"रैना" टेडी हो उसकी रहम नजर,
जो ऐसे ही अहम गरूर करो गे। "रैना"
देखते है आप को कैसा लगता है।
तुम इक दिन अर्जी मंजूर करो गे,
मिर बाद मुझे याद जरुर करो गे।
बेशक मुझको तो इतना भी पता है,
इक तुम ही मुझको मशहूर करो गे।
आँखों से तो हो जाये गे ओझल,
मुझको दिल से कैसे दूर करे गे।
तेरे दम से महफ़िल बानूर हुई,
लगता तुम बज्म को बेनूर करो गे।
"रैना" टेडी हो उसकी रहम नजर,
जो ऐसे ही अहम गरूर करो गे। "रैना"
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