sufi tadka
गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012
main sagar hu
घेरे रहती मुझको निराशा,
मैं सागर हूँ फिर भी प्यासा,
समझे न सके मेरी पीड़ा,
इस तड़फन राज जरा सा।
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