प्रथम शैली पुत्री माता,
कल्याण करो कल्याण करो,
और तो हम कुछ न मांगे,
मेरे सिर पर हाथ धरो,
कल्याण करो .............
मइया मुशिकल आन पड़ी,
घबराई है मेरी जान बड़ी,
दर्दो गम और लाचारी है,
जीवन पे अब दुःख भारी है,
मेरे दिल के जख्मों पे माँ,
मरहम लगा के अब भरो,
कल्याण करो .............
भक्त ध्यानु सी शान दे दो माँ,
अपनी भक्ति का दान दे दो माँ,
तुच्छ सी ये मांग हमारी,
हो जाये माँ किरपा तुम्हारी,
देख के दुनिया की हालत को,
दुखी है मेरा मन डरो।।।।"रैना"
जय माता दी ,,,,,,,,,,जय जय माँ।।।।
कल्याण करो कल्याण करो,
और तो हम कुछ न मांगे,
मेरे सिर पर हाथ धरो,
कल्याण करो .............
मइया मुशिकल आन पड़ी,
घबराई है मेरी जान बड़ी,
दर्दो गम और लाचारी है,
जीवन पे अब दुःख भारी है,
मेरे दिल के जख्मों पे माँ,
मरहम लगा के अब भरो,
कल्याण करो .............
भक्त ध्यानु सी शान दे दो माँ,
अपनी भक्ति का दान दे दो माँ,
तुच्छ सी ये मांग हमारी,
हो जाये माँ किरपा तुम्हारी,
देख के दुनिया की हालत को,
दुखी है मेरा मन डरो।।।।"रैना"
जय माता दी ,,,,,,,,,,जय जय माँ।।।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें