नींद से दुश्मनी हो गई,
रात से दोस्ती हो गई।
हम गिला मौत से क्यों करे,
बेवफा जिन्दगी हो गई।
यार को याद जब भी किया,
दिल कहे बन्दगी हो गई।
जी रहे बस बुरा हाल है,
शहर में गन्दगी हो गई।
हुस्न की बात होने लगी,
सच कहर सादगी हो गई।
काश"रैना"अभी समझता,
इश्क अब दिल्लगी हो गई। "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें