सुप्रभात के साथ एक प्यारी सी गज़ल
क्या खूब तेरी कुदरत है,
मुझ पे ख़ास ही रहमत है।
बेशक तुझसे न गिला कोई,
रोने की मेरी आदत है।
तूने सब कुछ ही बख्शा है,
तुझको मुझसे मोहब्बत है।
अब वो भी बैठा सोचे है,
बन्दे ने बदली फितरत है।
"रैना"अब भी सम्भल जा तू,
वरना आये तेरी शामत है। ....."रैना"
जय माँ अम्बे ....................
क्या खूब तेरी कुदरत है,
मुझ पे ख़ास ही रहमत है।
बेशक तुझसे न गिला कोई,
रोने की मेरी आदत है।
तूने सब कुछ ही बख्शा है,
तुझको मुझसे मोहब्बत है।
अब वो भी बैठा सोचे है,
बन्दे ने बदली फितरत है।
"रैना"अब भी सम्भल जा तू,
वरना आये तेरी शामत है। ....."रैना"
जय माँ अम्बे ....................
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