दोस्त जजों के समक्ष ताजा गज़ल
फैसला आप का गज़ल कैसी है।
बुझते शोलों को हवा दे गया कोई,
फिर से जीने की सजा दे गया कोई।
यू मुमकीन नही था मेरा बचना,
मुझको जीने की अदा दे गया कोई।
मरते मरते कम लोग बचा करते,
लगता है खास दुआ दे गया कोई।
देखो ऊपर वाला भी रोता है,
दोस्त दोस्त को दगा दे गया कोई।
"रैना" को सोना था लम्बी तान के,
क्यों उसको घर का पता दे गया कोई।।।।"रैना"
फैसला आप का गज़ल कैसी है।
बुझते शोलों को हवा दे गया कोई,
फिर से जीने की सजा दे गया कोई।
यू मुमकीन नही था मेरा बचना,
मुझको जीने की अदा दे गया कोई।
मरते मरते कम लोग बचा करते,
लगता है खास दुआ दे गया कोई।
देखो ऊपर वाला भी रोता है,
दोस्त दोस्त को दगा दे गया कोई।
"रैना" को सोना था लम्बी तान के,
क्यों उसको घर का पता दे गया कोई।।।।"रैना"
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