दोस्तों प्यार विषय पर अलग सी ग़ज़ल
आँखे तरसे तड़फे मन अति प्यासा,
न जनत है कोई प्यार की परिभाषा।
आशिक तब ही रोये धक्के खाये,
समझा न जमाना ये भेद जरा सा।
कहते लोगों ने चाँद हैं पकड़ा,
सोचे चाँद किसने कैसे तलाशा।
दर्दे दिल को बस आशिक ही जाने,
दुनिया के खातिर ये खेल तमाशा।
प्यार करो प्यार नसीहत ही देते,
आशिक बदकिस्मत को मिलत निराशा।
अब दुनिया की कोई फिकर नही है,
"रैना" ने तो अपना यार तलाशा। "रैना"
आँखे तरसे तड़फे मन अति प्यासा,
न जनत है कोई प्यार की परिभाषा।
आशिक तब ही रोये धक्के खाये,
समझा न जमाना ये भेद जरा सा।
कहते लोगों ने चाँद हैं पकड़ा,
सोचे चाँद किसने कैसे तलाशा।
दर्दे दिल को बस आशिक ही जाने,
दुनिया के खातिर ये खेल तमाशा।
प्यार करो प्यार नसीहत ही देते,
आशिक बदकिस्मत को मिलत निराशा।
अब दुनिया की कोई फिकर नही है,
"रैना" ने तो अपना यार तलाशा। "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें