ग़ज़ल
है तमन्ना कभी बात हो,
देखते कब मुलाकात हो।
सोचते हम कई साल से,
काश अब आज बरसात हो।
चांदनी हो खिली कमल सी,
मिलन की खास शुभरात हो।
भूलता आदमी क्यों भला,
कर्म से ही बनी जात हो।
है वफा का सिला ये मिला,
लाख गम खाक जजबात हो।
जख्म नासूर हैं बन गये,
रास्ता देखती मौत हो।
जानते हाल जब "रैन का,
पूछते क्यों सवालात हो। "रैना"
है तमन्ना कभी बात हो,
देखते कब मुलाकात हो।
सोचते हम कई साल से,
काश अब आज बरसात हो।
चांदनी हो खिली कमल सी,
मिलन की खास शुभरात हो।
भूलता आदमी क्यों भला,
कर्म से ही बनी जात हो।
है वफा का सिला ये मिला,
लाख गम खाक जजबात हो।
जख्म नासूर हैं बन गये,
रास्ता देखती मौत हो।
जानते हाल जब "रैन का,
पूछते क्यों सवालात हो। "रैना"
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