दोस्तो चिंतन करने को सूफी गीत,
बना फिरता तू मस्त मलंग,सोच लें ये भी है होना,
महबूबा जब लेने आये,फिर लम्बी तान के सोना।
महबूबा जब लेने आयेगी ..................................
यहाँ तो रोने हंसने में ही लगी ये सारी खुदाई हैं,
करते है झूठ की खेती कहने को नाम कमाई हैं,
हाय हमें किस्मत ने मारा,सब का यही रोना है।
महबूबा जब लेने आयेगी ...............................
बेशक बहुत खुली दुनिया मगर दिल हुआ छोटा,
वक्त आ गया ऐसा अब तो चलता सिक्का खोटा,
तू तो उसको याद रखना जमाने सा नही होना।
महबूबा जब लेने आयेगी ..............................
साजन से किये वादे कसमें तू भूल नही जाना,
मोह माया के झूले में बैठ के झूल नही जाना,
"रैना"ये दस्तूर जीवन का कुछ पाने को खोना।
महबूबा जब लेने आयेगी ............................."रैना"
बना फिरता तू मस्त मलंग,सोच लें ये भी है होना,
महबूबा जब लेने आये,फिर लम्बी तान के सोना।
महबूबा जब लेने आयेगी ..................................
यहाँ तो रोने हंसने में ही लगी ये सारी खुदाई हैं,
करते है झूठ की खेती कहने को नाम कमाई हैं,
हाय हमें किस्मत ने मारा,सब का यही रोना है।
महबूबा जब लेने आयेगी ...............................
बेशक बहुत खुली दुनिया मगर दिल हुआ छोटा,
वक्त आ गया ऐसा अब तो चलता सिक्का खोटा,
तू तो उसको याद रखना जमाने सा नही होना।
महबूबा जब लेने आयेगी ..............................
साजन से किये वादे कसमें तू भूल नही जाना,
मोह माया के झूले में बैठ के झूल नही जाना,
"रैना"ये दस्तूर जीवन का कुछ पाने को खोना।
महबूबा जब लेने आयेगी ............................."रैना"
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