रविवार, 28 अक्टूबर 2012

yojnabad daka

योजनाबद डाका डालने को कसे लंगोटे हैं,
डाकूओं ने मिल बैठ कर बदले मुखौटे हैं।
जनता को मुर्ख बनाने को चली है ये चाल,
वैसे पहले वालो के पूरे हो गये अब कोटे है।
सब का मकसद एक लूट खसोट भ्रष्टाचार,
किसी को कम न जानिए बड़े क्या छोटे है। 
अति उजले कपड़े पहनते होठों पे मुस्कान,
कड़वी ये सच्चाई ये तो दिल के काले झोटे हैं।
देश को गिरवी धरने में इनको नही संकोच,
माया सूरा सुन्दरी के शौक़ीन दिल के खोटे हैं।
"रैना"विदेशी सोचते अब देख नेताओं का हाल,
राम रहीम के देश में क्या मसीहा ऐसे होते है।      "रैना"

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