सूरज का ढलना बाकी है,
राही का चलना बाकी है।
शाम ढली अन्धेरा भी है,
फकत शमा जलना बाकी है।
दिल के घर में अक्सर चर्चा
अरमान का पलना बाकी है।
मेरी तेरी मोहब्बत का ,
अब किस्सा बनना बाकी है।
रैना" बैठा सोचे अक्सर,
बस बर्फ पिगलना बाकी है, "रैना"
राही का चलना बाकी है।
शाम ढली अन्धेरा भी है,
फकत शमा जलना बाकी है।
दिल के घर में अक्सर चर्चा
अरमान का पलना बाकी है।
मेरी तेरी मोहब्बत का ,
अब किस्सा बनना बाकी है।
रैना" बैठा सोचे अक्सर,
बस बर्फ पिगलना बाकी है, "रैना"
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