sufi tadka
मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012
bichhude muddt ho gai
बिछुड़े मुद्दत हो गई,
किया न सोच विचार,
राम को मिलने के लिए,
तू मन का रावण मार। "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें