दोस्तों आप की खिदमत में इक और ग़ज़ल
दोस्तों मेरे द्वारा पोस्ट ग़ज़ल शेर व्यंग्य ताजा लिखे जाते है,
कॉमेंट्स कर मेरा हौसला बढ़ाने पर आप आभार व्यक्त करता हूँ।
बदल न जाना आदत जैसे,
कायम रहना फितरत जैसे,
अरमान का क्या ये भी टूटे,
साथ निभाना हसरत जैसे।
इस से ज्यादा कह न सकेगे,
तुम तो लगते उल्फत जैसे।
पानी सर से गुजरे अब तो,
लगता आये कयामत जैसे।
"रैना" बेवजह तड़फता है,
होगा चाहे कुदरत जैसे। ......"रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें