कालरात्रि माता काली,
मुंड धारणी खप्परवाली,
करो अँधेरा दूर,
माता अर्ज करो मंजूर,
करो अँधेरा ..........
भक्तजन मजबूर,
मइया जी करो अँधेरा दूर ..
करो अँधेरा .................
शीश झुकाने कहाँ पे जाये,
पागल मनवा समझ न पाये,
हर तरफ है छीना झपटी,
बाँट जोह रहे बैठे कपटी,
राह देख रही दुनिया सारी,
दुःख हरे गी मइया प्यारी,
हर दिल हर घर में माँ काली,
चमके तेरा नूर।
करो अँधेरा .........
भक्तजन बहुत तंग है माता,
दुनिया का बदला रंग है माता,
सच की कीमत कोई न जाने,
झूठ बैठ गया आन सिरहाने,
दुष्टों का माँ भ्रम तू तोड़े,
खप्पर धारण कर खून निचौड़े,
और न ज्यादा देर करो,
दुष्टों का तोड़ गरूर,
करो अँधेरा ................"रैना"
जयकारा शेरोवाली का,
बोलो सच्चे दरबार की जय ........
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