व्यंग्य कविता
विदेशी नेता सौ साल की सोचते न थकते हैं,
भारत के नेता सिर्फ पांच वर्ष की सोच रखते हैं।
विदेशी सोचते देश को आगे कैसे बढ़ाना है,
हमारे नेता सोचते कुर्सी को कैसे बचाना है।
विदेशी नेता पैसे को हाथ भी न लगाते हैं,
अपने देश का धन अपने देश पर लगाते है।
मगर ये बेशर्म लाखों करोड़ डकार जाते है,
पैसे जा कर स्विस बैंक में जमा करवाते हैं।
विदेशों में न कोई किसी प्रकार का ही वाद है,
मगर यहाँ भाई भतीजा और दामादवाद है।
परिवार व पार्टी वाद ने देश बरबाद किया है,
फिर भी हमने कोई भी सबक न लिया है।
जागो परिवार व पार्टी वाद की परम्परा तोड़ो,
देशवासियों इतिहास के नये पन्ने जोड़ो।
तभी हमारा कल्याण होगा,
भारत देश और महान होगा।
भारत माता की जय ...... जय माँ भारती
विदेशी नेता सौ साल की सोचते न थकते हैं,
भारत के नेता सिर्फ पांच वर्ष की सोच रखते हैं।
विदेशी सोचते देश को आगे कैसे बढ़ाना है,
हमारे नेता सोचते कुर्सी को कैसे बचाना है।
विदेशी नेता पैसे को हाथ भी न लगाते हैं,
अपने देश का धन अपने देश पर लगाते है।
मगर ये बेशर्म लाखों करोड़ डकार जाते है,
पैसे जा कर स्विस बैंक में जमा करवाते हैं।
विदेशों में न कोई किसी प्रकार का ही वाद है,
मगर यहाँ भाई भतीजा और दामादवाद है।
परिवार व पार्टी वाद ने देश बरबाद किया है,
फिर भी हमने कोई भी सबक न लिया है।
जागो परिवार व पार्टी वाद की परम्परा तोड़ो,
देशवासियों इतिहास के नये पन्ने जोड़ो।
तभी हमारा कल्याण होगा,
भारत देश और महान होगा।
भारत माता की जय ...... जय माँ भारती
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