दोस्तों आप की नज़र
रिश्तों पे बर्फ जमी सी है,
दिल में फ़िलहाल नमी सी है।
रब ने सब कुछ तो बख्शा है,
पर तेरे बगैर कमी सी है।
हुस्न अदा क्या तारीफ करु,
हूर परी फूल कली सी है।
हो सकता है कुछ हल निकले,
आगे अब बात बढ़ी सी है।
पहले तो उठता है धुँआ
जब भी ये आग जली सी है।
"रैना"आखिर कब तक देखे,
कुछ दिन तो बात टली सी है। "रैना"
रिश्तों पे बर्फ जमी सी है,
दिल में फ़िलहाल नमी सी है।
रब ने सब कुछ तो बख्शा है,
पर तेरे बगैर कमी सी है।
हुस्न अदा क्या तारीफ करु,
हूर परी फूल कली सी है।
हो सकता है कुछ हल निकले,
आगे अब बात बढ़ी सी है।
पहले तो उठता है धुँआ
जब भी ये आग जली सी है।
"रैना"आखिर कब तक देखे,
कुछ दिन तो बात टली सी है। "रैना"
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