दोस्तों मेरे मन की रचना????
आप को कैसी लगी,
तुझसे बिछुड़े तेरी मरजी,
कब चलती है मेरी मरजी।
अब तो मुझको तू मिल जा रे,
गुल बन बगिया में खिल जा रे।
तेरे बिन अब मनवा तरसे,
नैना सावन जैसे बरसे।
मन में ज्वाला दहके हरदम,
किस नगरी में बसते बालम।
पंख फैला के मैं उड़ आऊ,
साजन को फिर कन्ठ लगाऊ।
प्यासी आंखे जी भर पी ले,
"रैना"फिर सदियों तक जी ले। "रैना"
आप को कैसी लगी,
तुझसे बिछुड़े तेरी मरजी,
कब चलती है मेरी मरजी।
अब तो मुझको तू मिल जा रे,
गुल बन बगिया में खिल जा रे।
तेरे बिन अब मनवा तरसे,
नैना सावन जैसे बरसे।
मन में ज्वाला दहके हरदम,
किस नगरी में बसते बालम।
पंख फैला के मैं उड़ आऊ,
साजन को फिर कन्ठ लगाऊ।
प्यासी आंखे जी भर पी ले,
"रैना"फिर सदियों तक जी ले। "रैना"
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