दोस्तों खास आप के लिए
बात वफा की कुत्ते ही भले निकलें,
बंदें तो अक्सर दिल के जले निकलें ।
हमको रास कभी न उजाला आया,
सच हम तो घर से शाम ढले निकलें।
खत्म किया हमने सारा ही किस्सा,
क्यों अरमानों के बच्चे पले निकलें।
सम्भाल रखे जो मुद्दत ख़त उनके,
बक्सा खोल के देखा वो गले निकलें।
अब पीछे से फिर आवाज न देना,
"रैना"अब लम्बे सफर पे चले निकलें। ....."रैना"
बात वफा की कुत्ते ही भले निकलें,
बंदें तो अक्सर दिल के जले निकलें ।
हमको रास कभी न उजाला आया,
सच हम तो घर से शाम ढले निकलें।
खत्म किया हमने सारा ही किस्सा,
क्यों अरमानों के बच्चे पले निकलें।
सम्भाल रखे जो मुद्दत ख़त उनके,
बक्सा खोल के देखा वो गले निकलें।
अब पीछे से फिर आवाज न देना,
"रैना"अब लम्बे सफर पे चले निकलें। ....."रैना"
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