माँ ब्रह्मचारनी,
शिव की पुजारनी,
भक्तों के दुख दूर करे,
मइया भवतारनी।
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ
महामाई का दूजा रूप प्यारा,
सारे जग में फैला उज्यारा
मन भाये लगता है प्यारा,
सच्चे भक्तो का है सहारा,
हाँ भाग्य सवारनी
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ...
हाथ त्रिशूल कमल है साजे,
मुख चमके सूर्य सम लागे,
भक्त जनों के भाग्य जागे,
पापीछिपते माँ से दूर भागे,
माँ दुष्ट मारनी
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ..."रैना"
शिव की पुजारनी,
भक्तों के दुख दूर करे,
मइया भवतारनी।
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ
महामाई का दूजा रूप प्यारा,
सारे जग में फैला उज्यारा
मन भाये लगता है प्यारा,
सच्चे भक्तो का है सहारा,
हाँ भाग्य सवारनी
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ...
हाथ त्रिशूल कमल है साजे,
मुख चमके सूर्य सम लागे,
भक्त जनों के भाग्य जागे,
पापीछिपते माँ से दूर भागे,
माँ दुष्ट मारनी
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ..."रैना"
बहुत सुन्दर.....
जवाब देंहटाएंअनु
बहुत सुन्दर माता की स्तुति...
जवाब देंहटाएंशुभकामनाएँ...
:-)
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यरसुरैरमरैरपि।
जवाब देंहटाएंसेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।
लाजवाब.आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.