सूफी गीत
तुम इस शहर में आये कुछ कमाने के लिये,
याद रखना वक्त मुकर्र,यहाँ से जाने के लिये।
तुम इस शहर में .......................
हैं बहुत अरमान जवान तेरी हसरते रहती,
लूट ले तू मौज बहारें ये ही दिल की कहती,.
है तू बेताब बहुत सबकुछ लुटवाने के लिये।
तुम इस शहर में .......................
अभी तो गौर नही याद आयेगी शाम ढले,
कोई भी न पुकार सुने तन्हा बैठे हाथ मले,
शर्म के मारे लव न खुले दर्द सुनाने के लिये।
तुम इस शहर में ......................
"रैना"अब भी वक्त है हसीं ये पल न गवा,
जो साजन तेरा उसका तू दीवाना हो जा,
फिर वो खुद आये चमन महकाने के लिये। ..."रैना"
तुम इस शहर में आये कुछ कमाने के लिये,
याद रखना वक्त मुकर्र,यहाँ से जाने के लिये।
तुम इस शहर में .......................
हैं बहुत अरमान जवान तेरी हसरते रहती,
लूट ले तू मौज बहारें ये ही दिल की कहती,.
है तू बेताब बहुत सबकुछ लुटवाने के लिये।
तुम इस शहर में .......................
अभी तो गौर नही याद आयेगी शाम ढले,
कोई भी न पुकार सुने तन्हा बैठे हाथ मले,
शर्म के मारे लव न खुले दर्द सुनाने के लिये।
तुम इस शहर में ......................
"रैना"अब भी वक्त है हसीं ये पल न गवा,
जो साजन तेरा उसका तू दीवाना हो जा,
फिर वो खुद आये चमन महकाने के लिये। ..."रैना"
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