मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

diwar chahe kchchi hoti

चाहे छत टपके दीवारे कच्ची लगती,
अपने घर की मिट्टी फिर भी अच्छी लगती।
मतलब के होते जाये अब सारे रिश्ते,
माँ की मोहब्बत ही निश्छल सच्ची लगती।  "रैना"

chahe chhat tpke diware kchchi lgti,
apne ghar ki mitti fir bhi achchhi lgti.
matlb ke hote jaye ab sare rishte,
maa ki mohbbt hi nishchhl schchi lgti.  "raina"

gar milna mushikl

दोस्तों मेरे मन की रचना????
 आप को कैसी लगी,

तुझसे बिछुड़े तेरी मरजी,
कब चलती है मेरी मरजी।
अब तो मुझको तू मिल जा रे,
गुल बन बगिया में खिल जा रे।
तेरे बिन अब मनवा तरसे,
नैना सावन जैसे बरसे।
मन में ज्वाला दहके हरदम,
किस नगरी में बसते बालम।
पंख फैला के मैं उड़ आऊ,
साजन को फिर कन्ठ लगाऊ।
प्यासी आंखे जी भर पी ले,
"रैना"फिर सदियों तक जी ले। "रैना"

jindgi ka

जिन्दगी का रास्ता आसान कब है,
कहर,मुश्किल से डरा इन्सान कब है।
ठान मन में आदमी जब भी चला है,
रोक पाया फिर कदम तूफान कब है। "रैना"

jindgi ka rasta aasan kab hai,
kahar mushkil se dra insan kab hai.
thhan mn me aadmi jb bhi chla hai,
rok paya fir kadm tufan kab hai.  "raina"
good evening ke sath..........

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

sir pe na koi udhari

 सिर पे कोई न उधारी हो,
यूं सुख सुविधा भी सारी हो।

मैं हाथ न फैलाऊ मौला,
चाहे पोक्ट कम भारी हो।

घर लड़के के बिन सूना है,
हसरत इक बेटी प्यारी हो।

अब तो अपना हाल बुरा है,
यूं दुश्मन ने न गुजारी हो।

"रैना"की ये विनती मालिक,
हम पे कृपा तुम्हारी हो।  "रैना"


रविवार, 28 अक्टूबर 2012

bewajh panga n lijiye

बेवजह पंगा न लिया जाये,
जो होता होने दिया जाये।
अपने तक आये न आंच,
कुछ ऐसा ही किया जाये।

दीप मन में जब जले गें,
बाग़ में गुल तब खिले गें।

राह मुश्किल कब लगे है,
ठान कर जब हम चले गें। 

पेट सिकुड़े भूख से जब,
बात दिल की तब सुने गें।

जिन्दगी से क्यों गिला है,
करम से ही सुख मिले गें।

काश "रैना"मान जाये,

यार से जा क्या कहे गें।  "रैना"
बात दिल की जब सुने गें,
फूल गुलशन में खिले गें,

ठान कर जब भी चले गें,
रास्ते खुद ही बने गें।
राह मुशिकल मत दुखी हो,

दीप मन में जब जले गें,
बाग़ में गुल तब खिले गें।
राह मुश्किल कब लगे है,
ठान कर जब हम चले गें। 
पेट सिकुड़े भूख से जब,
बात दिल की तब सुने गें।
जिन्दगी से क्यों गिला है,
करम से ही सुख मिले गें।
काश "रैना"मान जाये,
यार से जा क्या कहे गें।  "रैना"








yojnabad daka

योजनाबद डाका डालने को कसे लंगोटे हैं,
डाकूओं ने मिल बैठ कर बदले मुखौटे हैं।
जनता को मुर्ख बनाने को चली है ये चाल,
वैसे पहले वालो के पूरे हो गये अब कोटे है।
सब का मकसद एक लूट खसोट भ्रष्टाचार,
किसी को कम न जानिए बड़े क्या छोटे है। 
अति उजले कपड़े पहनते होठों पे मुस्कान,
कड़वी ये सच्चाई ये तो दिल के काले झोटे हैं।
देश को गिरवी धरने में इनको नही संकोच,
माया सूरा सुन्दरी के शौक़ीन दिल के खोटे हैं।
"रैना"विदेशी सोचते अब देख नेताओं का हाल,
राम रहीम के देश में क्या मसीहा ऐसे होते है।      "रैना"

sirt bdli

योजनाबद डाका डालने को कसे लंगोटे,
 डाकूओं ने मिल बैठ कर बदले मुखौटे। "रैना"





नींद से दुश्मनी हो गई,
रात से दोस्ती हो गई।
हम गिला मौत से क्यों करे,
बेवफा जिन्दगी हो गई।
यार को याद जब भी किया,
दिल कहे बन्दगी हो गई।
जी रहे बस बुरा हाल है, 
शहर में गन्दगी हो गई।
हुस्न की बात होने लगी,
सच कहर सादगी हो गई।
काश"रैना"अभी समझता,
इश्क अब दिल्लगी हो गई।  "रैना"

शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

bat dil ki jab sune

बात दिल की जब सुने गें,
फूल गुलशन में खिले गें,
ठान कर आगे बढ़े गें,
रास्ते तब ही बने गें।

sab se wfa krta

 दोस्त दगा करते रहे,,
 हम तो वफा करते रहे,
आंखें खुली समझे तभी,
"रैना" खता करते रहे। "रैना"
 


kdvi schchai



कविता
         देशी घी के पकवान

जीते जी तो ???
राजू की माँ रही परेशान,
उस वक्त तो राजू को ????
आया न माँ का ध्यान,
भूखी प्यासी दुखयारी ने,
दे दी अपनी जान,
माँ के मरने बाद राजू ????
दिखाए है झूठी शान,
भोज में खिलाये लोगों को,
देशी घी के पकवान।
"रैना"कहे जीते जी माँ बाप का ????
मत करो अपमान,
जन्म देने वाले यही तो है भगवान। ..."रैना"
सुप्रभात जी ............good morning ji

mangai pankh failati rhi.

खुली कविता है जी सेमी ग़ज़ल

ये महंगाई तो पंख फैलाती रही,
यूँ त्यौहारों की ख़ुशी जाती रही,
रसौई गैसे के फिर बढ़ा दिये दाम,
दुखी जनता रोती चिल्लाती रही।
माँ ने पेट भर न कभी खाना खाया,
बेटी की शादी के लिए पैसे बचाती रही।
देख कर अपनी ही पतली हालत को,
हंसी होठो पे आकर वापिस जाती रही।
जिसके बारे में मैंने कभी सोचा नही,
वो आकृति मेरे सपनों में आती रही।
बेशक मौत से तो डरता है हर कोई,
यूँ जिंदगी मौत को ठेगा दिखाती रही।
शमा तू जले ये तो तेरी किस्मत है,
फिर तू परवाने को क्यों जलाती रही। "रैना"

desha ma deshg

हरी के अपने प्रदेश हरियाणा पर कटाक्ष कर रहा हूँ,
अपने विचारों से अवगत करवाए।
 पहले कहते थे??????????
देसा मा देस हरयाणा,
जहाँ दूध दही घी का खाना।
और अब?????????????
देसा मा देस हरयाणा,
इब हर घर स मयखाना। "रैना"

sutte lga gye aur

सुट्टे लगाते रहे और ही हम चिलम भरते रह गये,
प्रमोशन चम्मचों को मिला हम कर्म करते रह गये। ... "रैना"

rajniti ki hwa

राजनीति की तेज हवा चली हुई है देश में,
भेडिये खुले आम घूम रहे नेता के भेष में।
देखिये तो अब हाल इस देश के मसीहों का,
हर कोई फसा हुआ किसी न किसी केस में,
कोयला खा गये चारा खा गये सारा देश,
देखो बेशर्म बेईमान पैसा जमा करे विदेश में।

"रैना" अच्छा है जो हो रहा दिल न जला,
तू भी नेता बन जा क्या रखा है क्लेश में। "रैना"

pahle ldke dudh ghi

पहले लड़के दूध घी खाते थे,
और हष्ट पुष्ट नजर आते थे,
मगर अब लड़के बेल पूरी खाते है,
इलू इलू गाते है???????
और कांगड़ी पहलवान नजर आते है। "रैना"

yu khyalon me

यूँ ख्यालों में खोना अच्छा कब है,
देखा सपना होता सच्चा कब है,
पांच दर्जन देख चुका है बसन्त,
ये दिल तेरा फिर अब बच्चा कब है। "रैना"

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

kamal hai

कमाल है कमाल है कमाल है,
भारत देश में सिर्फ भेड़ चाल है।
हमने उन्हें लूटने का रास्ता खुद दिखाया है,
वक्ताओं को सत गुरु बाबा बनाया है।
जिनका त्याग तपस्या न कोई रियाज है,
फिर भी वो हमारा बाबा सतगुरु महाराज है।
ये बात समझ नही आती,
बाबा के पीछे जनता क्यों दौड़ी जाती।
आदि शक्ति का अंश महिलाये????
ठगों के पैरो में माथा रगडती है,
मेरी माँ बहनें सच्चाई को न पकडती हैं।
ऐ मेरी बहनों??????
तुम चाहो तो यमराज को झुका सकती हो,
लक्ष्मी बाई बन तलवार चला सकती हो,
तुम अब तो जहाज भी उड़ा सकती हो।
फिर अब दौराहे पे क्यों खड़ी हो,
बाबा के चक्करों में क्यों पड़ी हो।
ये बाबा खुद भिखारी है,
सिर्फ माया के पुजारी है।
कुछ बाबाओं ने फ़िल्मी कलाकार नौकरी पे लगा रखे हैं,
वैसे लगते बाबा के भक्त पक्के है।
कुछ बाबा तो किराये की सुंदरियां नचवाते है,
उनसे अपने चरणों में आर्टिफिशल गहने चड़वाते है,
ये सब देख भोली भाली महिलाये प्रभावित हो जाती है,
और अपने असली सोने गहने के चढ़ा आती है।
ये कहने को सूफी पीते है बोतल आधी,
झूठ के देकेदार नाम है सत्यवादी।
मेरी आप सबसे हाथ जोड़ विनती??????
बाबा के चक्करों में न आयो,
अपने माँ बाप की सेवा में ध्यान लगाओ।
शुद्द कमाओ शुद्द खायो।   ......................"रैना"



niand ko dushmni hamse

नींद से दुश्मनी हो गई,
रात से दोस्ती हो गई।
क्यों गिला मौत से ही करे,
बेवफा जिन्दगी हो गई।
यार को याद जब भी किया,
दिल कहे बन्दगी हो गई।
जी रहे बस बुरा हाल है, 
शहर में गन्दगी हो गई।
हुस्न की बात होने लगी,
सच कहर सादगी हो गई।
काश"रैना"अभी समझता,
इश्क अब दिल्लगी हो गई।

sare shahar men

दोस्तों आप की तवाजो चाहू गा।

तूने हमें अक्सर रूलाया बहुत है,
ये दर्द हमने भी छुपाया बहुत है।
है बेवफा या बावफा सच सच बता,
कातिल अदा ने दिल सताया बहुत है।
सीरत नही अब लोग सूरत देखते,
इन्सान ने खुद को गिराया बहुत है।
खिदमत करें माँ बाप की ये फर्ज है,
माँ बाप ने तो दुःख उठाया बहुत है।
है आदमी ही गल्त जो उठता नही,
आवाज दे उसने जगाया बहुत है।
"रैना"भला तुझसे गिला कैसे करे,
मुश्किल घड़ी में भी हंसाया बहुत है, "रैना"



बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

sab ne hi jana hai

सब ने ही जाना हैं,
जाना तो ऐसा जाना,
लौट के न आना हैं।
सब ने ही ..........
राजा वजीर चाहे,
जोगी फकीर चाहे,
अंत है निशचित,
राँझा हो हीर चाहे,
सब के ही वास्ते,
एक ही ठिकाना हैं।
सब ने ही ...........
रावण गयो राम गयो
कंस धनश्याम गयो,
समझा न कोई अबतक,
कोन से धाम गयो,
ये तो सच्चाई है,
ये शहर बेगाना है।
सब ने ही ............
"रैना" ये कम कर,
मौत से कभी न डर,
औरों की सेवा कर,
जीवन में सुख भर,
उसने है रचा सारा,
उसका ताना बाना है।
सब ने ही ............"रैना"
gazal k nya rang

चाहे रूतबा उंचा कद हो, 
पर अरमानों की इक हद हो। 
खाना पीना मस्ती सोना,
जीवन का कोई मकसद हो।
गर जीने की हसरत बाकी,
फिर तो ये दिल पत्थर शद हो।
इस से तो मरना ही अच्छा 
तू हरगिज बन्दे मत बद हो,
फिर तो गुल जैसा खिल जाये,
जो "रैना" तेरा अरशद हो। "रैना"

शद=मजबूत, अरशद=शिष्य 
chahe rutba uncha kad ho,
par armano ki ik had ho.
khana pina masti sona,
jiwan ka koi maksad ho.
gar jine ki hasrat baki,
fir to ye dil ptthr shad ho.
is se to mrna hi achchha,
tu hargij bande mat bad ho.
fir to gul jaisa khil jaye,
jo "raina" tera arshad ho. "raina"
shad=mjbut, arshad=shishy

chahe rutba uncha

चाहे रूतबा उंचा कद हो,
अरमानों की तो इक हद हो।
खाना पीना मस्ती सोना,
जीवन का कोई मकसद हो।

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

bichhude muddt ho gai

बिछुड़े मुद्दत हो गई,
किया न सोच विचार,
राम को मिलने के लिए,
तू मन का रावण मार। "रैना"
  

doston dshhar

दोस्तों आओ ????????
अब की बार दशहरा????
कुछ इस तरह मनाये,
रावण जी के पुतले को नही?????
मन में बैठे रावण को जलाये। "रैना"
जय सीता राम ........महा ज्ञानी रावण की जय ......

हम हर वर्ष रावण के ??
अनगिनत पुतले जलाते है,
अफ़सोस ??
ये भारत देश की बदकिस्मती है,
चार गुना और रावण पैदा हो जाते है।
वो रावण चाहे अभिमानी था,
पर महाज्ञानी खानदानी था।
मगर आज के रावणों को न,
कोई भी ज्ञान न खानदान है,
अक्सर सफेद कपड़ो में नजर आते,
आज के रावणों की यहीं पहचान है। "रैना"


hai tmnna kbhi

ग़ज़ल
है तमन्ना कभी बात हो,
देखते कब मुलाकात हो।
सोचते हम कई साल से,
काश अब आज बरसात हो।
चांदनी हो खिली कमल सी,
मिलन की खास शुभरात हो।
भूलता आदमी क्यों भला,
कर्म से ही बनी जात हो।
है वफा का सिला ये मिला,
लाख गम खाक जजबात हो।
जख्म नासूर हैं बन गये,
रास्ता देखती मौत हो।
जानते हाल जब "रैन का,
पूछते क्यों सवालात हो। "रैना"

videshi neta

व्यंग्य कविता

विदेशी नेता सौ साल की सोचते न थकते हैं,
भारत के नेता सिर्फ पांच वर्ष की सोच रखते हैं।
विदेशी सोचते देश को आगे कैसे बढ़ाना है,
हमारे नेता सोचते कुर्सी को कैसे बचाना है।
विदेशी नेता पैसे को हाथ भी न लगाते हैं,
अपने देश का धन अपने देश पर लगाते है।
मगर ये बेशर्म लाखों करोड़ डकार जाते है,
पैसे जा कर स्विस बैंक में जमा करवाते हैं।
विदेशों में न कोई किसी प्रकार का ही वाद है,
मगर यहाँ भाई भतीजा और दामादवाद है।
परिवार व पार्टी वाद ने देश बरबाद किया है,
फिर भी हमने कोई भी सबक न लिया है।
जागो परिवार व पार्टी वाद की परम्परा तोड़ो,
देशवासियों इतिहास के नये पन्ने जोड़ो।
तभी हमारा कल्याण होगा,
भारत देश और महान होगा।
भारत माता की जय ...... जय माँ भारती


सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

mere maola

मेरे मौला ऐसा कर दे,
सब की खाली झोली भर दे।
भूखे को मिल जाये रोटी,
मुफ्लिस को तू दौलत जर दे।
हर इक को दे अपना आंगन,
बेघर को सिर पे छत घर दे।
तेरी रहमत को सब माने,
इतना तो तू सबको डर दे।
उड़ कर पंछी मंजिल पा ले,
उड़ने खातिर सबको पर दे।
तुझको पाना मेरा मकसद,
"रैना" के सिर पे कर धर दे। ......"रैना"
सुप्रभात जी ........ जय माता की

mere maula aesa krde,
khali sabki jholi bhrde.
bhukhe ko mil jaye roti,
muflis ko tu dault jrde.
har ik ka ho apna aangan,
beghar ko sir pe chhat ghar de.
teri rahmat ko sab mane,
itna to tu sab ko drde.
ud ke panchhi manjil pa le,
udne khatir sabko prde.
tujhko pana mera maksad,
"raina" ke sir pe kar dhar de."raina"
good morning ji ......................

mere maola

mere maola aesa krde,
khali sabki jholi bhrde.
bhukhe ko mil jaye roti,
muflis ko tu dault jrde.
har ik ka ho apna aangan,
beghar ke sir pe chhat ghar de.
teri rahmat ko sab jane,
itna to sab ko drde.
mksad sabka tujhko pana,
sbke sir pe kar tu dhrde.
ud ke panchhi manjil pa le,
udne khatir sabko prde.
bigdi sabki kismat bdle,
raina" ko ab khush tu krde. "raina"


नेक सब काम करते रहे,        
यार के नाम करते रहे।           गम छुपा के रखे हम सदा,         सुख सरेआम करते रहे।        दूसरे शक न करते तभी,          सब खुलेआम करते रहे।         ये अदा ख़ास अपनी पता,          बात हम आम करते रहे।         

काश मैं छोड़ तू फकत तू,       
सुबह से शाम करते रहे।       
जिन्दगी भर करे बंदगी,          
"रैन"आराम करते रहे। "रैना"

 nek sab kaam karte rhe,
yaar ke nam karte rhe..
gam chhupa ke rkhe ham sda,
 sukh sareaam karte rhe.
 doosre shak n karte tbhi,
 sab khuleaam karte rhe.
 ye ada khas apni pta,
 baat ham aam karte rhe.
 kash mai chos tu fakat tu.
subah se sham karte rhe..
 jindgi bhar kre bandgi,
 "rain" aaram karte rhe."raina"

नेक सब काम करता रहू,        
यार के नाम करता रहू।           गम छुपा के रखू मैं सदा,         सुख सरेआम करता रहू।        दूसरे शक न करते तभी,          सब खुलेआम करता रहू।         ये अदा ख़ास अपनी पता,          बात मैं आम करता रहू।         

काश मैं छोड़ तू फकत तू,       
सुबह से शाम करता रहू,        
जिन्दगी भर करे बंदगी,          
"रैन"आराम करता रहू। "रैना"

 nek sab kaam karta rahu,
yaar ke nam karta rahu.
gam chhupa ke rakhoo mai sda,
 sukh sareaam karta rahu.
 doosre shak n karte tbhi,
 sab khuleaam karta rahu.
 ye ada khas apni pta,
 baat mai aam karta rahu.
 kash mai chos tu fakat tu.
subah se sham karta rahu.
 jindgi bhar kre bandgi,  
 "rain" aaram karta rahu."raina"
नेक सब काम करता रहू,        nek sab kaam karta rahu,
यार के नाम करता रहू।           yaar ke nam karta rahu.गम छुपा के रखू मैं सदा,         gam chhupa ke rakhoo mai sda,सुख सरेआम करता रहू।         sukh sareaam karta rahu.दूसरे शक न करते तभी,           doosre shak n karte tbhi,सब खुलेआम करता रहू।          sab khuleaam karta rahu.ये अदा ख़ास अपनी पता,           ye ada khas apni pta,बात मैं आम करता रहू।          baat mai aam karta rahu.

काश मैं छोड़ तू फकत तू,        kash mai chos tu fakat tu,
सुबह से शाम करता रहू,          subah se sham karta rahu.
जिन्दगी भर करे बंदगी,            jindgi bhar kre bandgi,  
"रैन"आराम करता रहू। "रैना"   "rain" aaram karta rahu."raina"



शौख इक शाम करता रहू।
प्यार बदनाम करता रहू।
गम छुपा के रखू गा सदा,
सुख सरेआम करता रहू।

kubbh

नेक सब काम करता रहू,  
यार के नाम करता रहू।

गम छुपा के रखू मैं सदा,
सुख सरेआम करता रहू।
दूसरे शक न करते तभी,
सब खुलेआम करता रहू।
ये अदा ख़ास अपनी पता,
बात मैं आम करता रहू।




शौख इक शाम करता रहू।
प्यार बदनाम करता रहू।
गम छुपा के रखू गा सदा,
सुख सरेआम करता रहू।

धर्म क्या है नही जानते,
मुर्ख खुद को खुदा मानते।
बंदगी पे किताबे लिखी,
खाक खुद ही रहे छानते।
वक्त के साथ हम भी चले,
लोग ये भ्रम अब पालते। 
भूख से जो निभाते रहे,
शिकन वो बल नही डालते।
शाम की फ़िक्र अब रैन को,
दिन चढ़े में न पहचानते। ...... "रैना"


dharm kya hai nhi jante,
murkh khud ko khuda mante.
bandgi pe kitabe likhi,
khak khud bhi rhe chhante.
waqt ke sath ham bhi chle,
log ye bhram ab palte.
bhukh se jo nibhate rhe,
shikan vo bal nhi dalte.
sham ki fikr ab "rain" ko,
din chrhe me n pahchante..."raina"

dharm kya

धर्म क्या है नही जानते,
मुर्ख खुद को खुदा मानते।
बंदगी पे किताबे लिखी,
खाक खुद ही रहे छानते।
वक्त के साथ हम भी चले,
लोग ये भ्रम अब पालते। 
भूख से जो निभाते रहे,
शिकन वो बल नही डालते।
शाम की फ़िक्र अब रैन को,
दिन चढ़े में न पहचानते। ...... "रैना"

रविवार, 21 अक्टूबर 2012

dur le

कोन मेरी सुनेगा सदा,
दूर ले जा रही है हवा।
काश ये मानती जिन्दगी,
साथ मेरे न करती दगा।
क्यों बुरा मैं कहू यार को,
ये सजा उस खुदा की रजा।
भूल बैठा न चिन्ता रही,
अर्ज मेरी मुझे भी जगा।
चुप रहु कुछ न बोलू सनम,
कर मुझे माफ़ दे दे सजा। "रैना"

tum kaya jno

जिन्दगी के लिये बन्दगी,
बन्दगी को मिली जिन्दगी।

यारों लिखने कुछ और रहा था लिख दिया कुछ और

जानता सब भला आदमी,
रास्ते कब चला आदमी
दुःख सहे चुप रहे क्या करे,
आग में फिर जला आदमी।
दूर तक नजर है दौड़ती,
भीड़ में कब मिला आदमी।
तब फटी आँख हैरान थी,
आदमी ने छला आदमी।
दूरियां कम नही बीच की,
आदमी से मिला आदमी।
अलविदा यार को कह चले,
क्या पता कब मिले आदमी।
है दुखी घर बसा छोड़ कर,
सफर पे फिर चला आदमी। "रैना"

दर्द के शहर में कब दवा,
बेवफा कर वफा दे दुआ।
ये बता क्या खता हो गई,
जान है जिस्म से क्यों जुदा।
जान बुझ ये खता क्यों करे,
दिल मिला फर्ज तू कर अता।
शहर में तू कहाँ खो गया,
ढूंढ़ते यार का हम पता।
दूर तक दस्त है रेत का,
इश्क तो दर्द है इक सजा।
शर्म तो तब करे कुछ मिले,
यार को यार अब दे दगा।
"रैन की शाम थी जब ढली,
यार कह चल दिये अलविदा। ....."रैना"

अफ़सोस अकेले ही जाना होगा,
कोई जाता
गर  तेरे साथ चले होते,
आखिर में इन्सान अकेला जाता।


raston pe barf jmi

दोस्तों आप की नज़र

 रिश्तों पे बर्फ जमी सी है,
दिल में फ़िलहाल नमी सी है।
रब ने सब कुछ तो बख्शा है,
पर तेरे बगैर कमी सी है।
हुस्न अदा क्या तारीफ करु,
हूर परी फूल कली सी है।
हो सकता है कुछ हल निकले,
आगे अब बात बढ़ी सी है।
पहले तो उठता है धुँआ
जब भी ये आग जली सी है।
"रैना"आखिर कब तक देखे,
कुछ दिन तो बात टली सी है। "रैना"

शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

husn ter kahar

इक ग़ज़ल दोस्तों के नाम

छलकता है हुस्न तेरा कहर ढाये,
सादगी ने चार चाँद भी लगाये।
तेरी नजरे तीर का दिल पे असर है,
मौत आती अब न दिल को चैन आये।
बेवफा होने लगे लख्ते जिगर भी,
आग घर को खून अपना ही लगाये।
हुस्न के दम से जमाना महकता है,
फूल खिलते बज्म रोशन नजर आये।
फेर ली है आँख तूने क्यों बता दे,
काश"रैना"बात अपनी पलट जाये। ...."रैना"

kalrtri kali maiya

 कालरात्रि माता काली,
 मुंड धारणी खप्परवाली,
करो अँधेरा दूर,
माता अर्ज करो मंजूर,
करो अँधेरा ..........
भक्तजन मजबूर,
मइया जी करो अँधेरा दूर ..
करो अँधेरा .................
शीश झुकाने कहाँ पे जाये,
पागल मनवा समझ न पाये,
हर तरफ है छीना झपटी,
बाँट जोह रहे बैठे कपटी,
राह देख रही दुनिया सारी,
दुःख हरे गी मइया प्यारी,
हर दिल हर घर में माँ काली,
चमके तेरा नूर।
 करो अँधेरा .........
भक्तजन बहुत तंग है माता,
दुनिया का बदला रंग है माता,
सच की कीमत कोई न जाने,
झूठ बैठ गया आन सिरहाने,
दुष्टों का माँ भ्रम तू तोड़े,
खप्पर धारण कर खून निचौड़े,
और न ज्यादा देर करो,
दुष्टों का तोड़ गरूर,
करो अँधेरा ................"रैना"
जयकारा शेरोवाली का,
बोलो सच्चे दरबार की जय ........


शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2012

skndhmata

स्कन्ध माता,
सुख की दाता,
विनती हमारी करो स्वीकार,
बख्शो प्यार माँ बक्शो प्यार।
बख्शो प्यार .....................
हर तरफ छल कपट है धोखा,
इमानदार अपने हाल पे रोता,
अब बदल गया माँ तेरा संसार।
बख्शो प्यार .....................
"रैना" से मइया  कर न तू दुरी,
जान भी लें माँ मेरी मज़बूरी,
माता जोड़ भी दे मन के तार।
बख्शो प्यार ....................."रैना"


muddt phle

मुद्दत पहले बिछुड़े,
ढूंढा तो बहुत मगर,
तेरे घर का पता ही,
न मिला भटके "रैना" ........"रैना"

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

kushmanda maa

कुषमाडा माँ जगकल्याणी तूने है उपकार किया,
सतरंगी इस दुनिया का माँ तूने विस्तार किया।
जय कुषमाडा माँ  जय ...............................
दयावान गुणवान माँ तू महान तेरी ऊँची शान,
हमें बक्शो चरणों की भक्ति करो विनती परवान,
जो चाहिए था मात भवानी मैंने है मांग लिया।
जय कुषमाडा माँ  जय ...............................
दुःख हरे सुख करे खोले बंद दरवाजे करे पुरे अरमान,
अहंकारी दुःख पाते दूर माँ से जाते है बड़े ही नादान,
"रैना" माँ से प्रीत लगा ले सब्र कर जो है माँ ने दिया।
  जय कुषमाडा माँ  जय ...............................
जय माता की ........जय कारा  शेरो वाली का
           बोलो सच्चे दरबार की जय।

mai chunta

मैं चुनता रहता हूँ अल्फाजों के मोती,
अब ये मेरी जीवन का श्रृगार करे गे। ..."रैना" 
महफ़िल में आ कर तेरी,
जाग उठे अरमान मिरे,
बेशक उनको मिल लेगे,
दोस्त जो अनजान मिरे।
हद में रहता हूँ अपनी,
 सीने में तूफान मिरे,
मैं जानू औकात मिरी,
दोस्त तो भगवान मिरे। ...."रैना"

il ke driche

दिल के दरिचें खोल रखे,
पर न किसी ने दस्तक दी।
मजबूरी में फिर" रैना"
दरवाजा ही खोल दिया। ..."रैना"
घर में ही ख़ुशी जब मिलती हो,
फिर गैरों के घर क्यों जाये,
जो जाये मुजरिम दोषी वो,
उस इससे सख्त सजा पाये। .."रैना"

rote de gath me

रोते हुये के हाथ में एक कलम देता गया,
वो यार था या मेरा दुश्मन समझ आई नही। ....."रैना"

दोस्तों खास आप के लिए

बात वफा की कुत्ते ही भले निकलें,
बंदें तो अक्सर दिल के जले निकलें ।
हमको रास कभी न उजाला आया,
सच हम तो घर से शाम ढले निकलें।
खत्म किया हमने सारा ही किस्सा,
क्यों अरमानों के बच्चे पले निकलें।
सम्भाल रखे जो मुद्दत ख़त उनके,
बक्सा खोल के देखा वो गले निकलें।
अब पीछे से फिर आवाज न देना,
"रैना"अब लम्बे सफर पे चले निकलें। ....."रैना"

wfa ki bat chali

दोस्तों खास आप के लिए

बात वफा की कुत्ते ही भले निकलें,
बंदें तो अक्सर दिल के जले निकलें ।
हमको रास कभी न उजाला आया,
सच हम तो घर से शाम ढले निकलें।
खत्म किया हमने सारा ही किस्सा,
क्यों अरमानों के बच्चे पले निकलें।
सम्भाल रखे जो मुद्दत ख़त उनके,
बक्सा खोल के देखा वो गले निकलें।
अब पीछे से फिर आवाज न देना,
"रैना"अब लम्बे सफर पे चले निकलें। ....."रैना"

बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

beshak jnta

बेशक जनता को??????
 एक बात समझ आई हैं???????
एक ही थैली के चट्टे बट्टे,
नेता???????????
चोर चोर मौसेरे भाई है।
कहने को जनता के शुभचिंतक,
सही मायनों में कसाई हैं।
किसी एक पर इल्जाम नही,
अब सब ने लूट मचाई है।
देखिये इन चोरों को ????????
बड़ी कड़वी लगती सच्चाई है।
कोई दामाद को बचाये,
कोई अध्यक्ष को साफ बताता है।
जो अधिकारी निष्पक्ष जाँच करे,
उसको बदला जाता है।
देश की जनता की बदनसीबी,
प्रधानमंत्री को सज्ञान न ले रहे,
कानून मंत्री????????
जान से मरने की धमकी दे रहे है।
बेशक अब भारत देश लगता,
अंधेर नगरी चौपट राजा,
गरीब इमानदार रो रहे,
बेईमान चोर उच्चके बजाये बाजा।
नेता कहते खाए जा खाए जा। ......."रैना"

chandrghanta maa

चंद्रघंटा माँ,कर दया माँ,
बख्शो चरणों की भक्ति,
तेरी भक्ति से ही माता,
मिलती जीवन शक्ति।
बख्शो चरणों की भक्ति .........
सुख की सागर माँ सुखदानी हो,
जीवन रक्षक माँ  कल्याणी हो,
माँ अर्धचन्द्र तेरे माथे पे साजे,
बैठी शेर पे मइया प्यारी लागे,
जग जननी आदि शक्ति।
बख्शो चरणों की भक्ति ........
चरणों से माँ कभी दूर न करना,
रहे तेरी किरपा मजबूर न करना,
रैना" का माँ जीवन सवंर जाये,
हर शै में माँ मुझे नजर तू आये,
इतना कर महाशक्ति।
बख्शो चरणों की भक्ति ........
जय माता की  जयकरा शेरोंवाली का,
बोलो सचे दरबार की जय। 

pyar kja hai

प्यार कजा संभल के करना,
दौर बुरा बेमौत न मरना।
दुश्मन वार करे सब जाने,
दोस्त चाल चले गा डरना।
औरों से लड़ता रहता है,
कब सीखे गा खुद से लड़ना।
जीवन पशु जैसा ही जीना,
फिर तय है दलदल में पड़ना।
"रैना" उल्फत सुख देती है,
मत नफरत की पुस्तक पढ़ना।  "रैना"

aankhe trfe

दोस्तों प्यार विषय पर अलग सी ग़ज़ल

आँखे तरसे तड़फे मन अति प्यासा,
न जनत है कोई प्यार की परिभाषा।

आशिक तब ही रोये धक्के खाये,
समझा न जमाना ये भेद जरा सा।

कहते लोगों ने चाँद हैं पकड़ा,
सोचे चाँद किसने कैसे तलाशा।


दर्दे दिल को बस आशिक ही जाने,
दुनिया के खातिर ये खेल तमाशा।

प्यार करो प्यार नसीहत ही देते,
आशिक बदकिस्मत को मिलत निराशा।

अब दुनिया की कोई फिकर नही है,
"रैना" ने तो अपना यार तलाशा। "रैना"



माँ ब्रह्मचारनी,
शिव की पुजारनी,
भक्तों के दुख दूर करे,
मइया भवतारनी। 
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ 
महामाई का दूजा रूप प्यारा,
सारे जग में फैला उज्यारा
मन भाये लगता है प्यारा,
सच्चे भक्तो का है सहारा,
हाँ भाग्य सवारनी
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ... 
हाथ त्रिशूल कमल है साजे,
मुख चमके सूर्य सम लागे,
भक्त जनों के भाग्य जागे,
पापीछिपते माँ से दूर भागे,
माँ दुष्ट मारनी 
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ..."रैना"

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

maa brhmcharni

माँ ब्रह्मचारनी,
शिव की पुजारनी,
भक्तों के दुखड़े हरती है,
दुखियों की झोली भरती है।
माँ ब्रह्मचारनी ...जय जय माँ ...
हाथ त्रिशूल कमल है साजे,


dil ke ik kone men

दिल के इक कोने में उठता धुँआ,
वैसे मुद्दत पहले चिराग बुझा था। "रैना"

om durge

ओम दुर्गे नमो ओम दुर्गे नमो
माँ धड़कन में माँ कण कण में,
तेरा असर है मइया जन जन में।
ओम  दुर्गे नमो .....................
दिन में तू माँ रात में तू,
साँझ में तू परबत में तू,
ओम  दुर्गे नमो .....................
हर ढंग में तू हर रंग में तू,
डोर में तू है पतंग में तू,
ओम  दुर्गे नमो .....................
फूलता फलता वंश माँ का,
बेशक हर नारी अंश माँ का,
ओम  दुर्गे नमो .....................
"रैना" तब कर काम कोई दूजा,
पहले कर तू देवी माँ की पूजा,
ओम  दुर्गे नमो .....................
माँ के मंदिर में जरुर तू आना,
पर घर बूढ़ी माँ को भूल जाना,
ओम  दुर्गे नमो ....................."रैना"
जय माता दी .........जय माता दी 
शौ केस से तेरी तस्वीर हटा दी हमने,
बेचारे इस दिल को बहुत सजा दी हमने।
तेरी यादें आबाद रही जिस बस्ती में,
उजड़ी वो बस्ती हर चीज मिटा दी हमने।
कुछ दिन तो बाकी थे मेरे इस जीवन के,
मजबूरी खुद को बेदर्द कजा दी हमने।
"रैना" की फितरत ही कुछ ऐसी है यारों,
अक्सर अपने दुश्मन को भी दुआ दी हमने।  "रैना"




न रही तमन्ना अपनों की,
खत्म हुई जिन्दगी जब गमगीन सपनों की।

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

prtham shail putri mata

प्रथम शैली पुत्री माता,
कल्याण करो कल्याण करो,
और तो हम कुछ न मांगे,
मेरे सिर पर हाथ धरो,
कल्याण करो .............
मइया मुशिकल आन पड़ी,
घबराई है मेरी जान बड़ी,
दर्दो गम और लाचारी है,
जीवन पे अब दुःख भारी है,
मेरे दिल के जख्मों पे माँ,
मरहम लगा के अब भरो,
कल्याण करो .............
भक्त ध्यानु सी शान दे दो माँ,
अपनी भक्ति का दान दे दो माँ,
तुच्छ सी ये मांग हमारी,
हो जाये माँ किरपा तुम्हारी,
देख के दुनिया की हालत को,
दुखी है मेरा मन डरो।।।।"रैना"
जय माता दी ,,,,,,,,,,जय जय माँ।।।।

umhare andaj

दोस्तों इक और गजल पेश है

तुम्हारे अन्दाज निराले देखो,
हम ने भी दर्दो गम पाले देखो।
तुम तो कुछ भी कह सकते हो,
अपने होठों पे हैं ताले देखो।
पहने फिरते उजले उजले कपड़े,
नेता दिल के बिलकुल काले देखो।
कोई न सुने आवाज गरीबों की,
छीने आदमखोर निवाले देखो।
देखा करते हो गुलशन की रौनक,
फुरसत में मेरे दिल के छाले देखो।
याद तिरी ने बहुत परेशान किया,
 जब खत तेरे पुराने निकाले देखो।
देश मिरे की हालत अब बदतर है,
लूट मचाये जीजा साले देखो।
"रैना" मुश्किल में अब जान हमारी,
लोग हवा में बात उछाले देखो।।।।"रैना"

manjil to bulati

युवा दोस्तों के लिए एक ग़ज़ल

मंजिल तो बुलाती है सबको,जाने वाले की मर्जी है,
वो हाथों को मलते रहते,जिनकी मेहनत ही फर्जी है।
क्यों दोषी किस्मत को कहते,ये दोष तिरे ही कर्मों का,
देख दयावान महान बड़ा, उसको सबसे हमदर्दी है।
 देना वाला सबको देता, लेने वाला भी हो कोई,
वो कैसे उस पे मान करे,जिसको लगे गर्मी सर्दी है।
उसने ही सब को हुनर दिया,जो जिसका हिस्सा दे डाला,
लकड़ी है कोई काट रहा,चारागर कोई दर्जी है।
सुन "रैना"जुल्म न करना तू,मेहतन की सूखी खा लेना।
औरों की सुध भी ले लेना,न कभी करनी खुदगर्जी है।  "रैना"

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

tum ik din

दोस्तों ये ग़ज़ल मेरे दिल का टुकड़ा है,
 देखते है आप को कैसा लगता है।

तुम इक दिन अर्जी मंजूर करो गे,
मिर बाद मुझे याद जरुर करो गे।
बेशक मुझको तो इतना भी पता है,
इक तुम ही मुझको मशहूर करो गे।
आँखों से तो हो जाये गे ओझल,
मुझको दिल से कैसे दूर करे गे।
तेरे दम से महफ़िल बानूर हुई,
लगता तुम बज्म को बेनूर करो गे।
"रैना" टेडी हो उसकी रहम नजर,
जो ऐसे ही अहम गरूर करो गे।   "रैना"

ik din meri arji

तुम इक दिन मेरी अर्जी मंजूर करो गे,
सच मेरे बाद मुझे याद जरुर करो गे।
मुझको 

teri yadon ke saye

प्यारे दोस्तों आप के लिए ग़ज़ल,

हम यादों के सहारे जीये जाते,
दिल को झूठी तसल्ली दीये जाते।
हम तुझको दोषी क्यों कैसे कह दे,
मान खता खुद पे सितम कीये जाते।
किस्मत के आगे सब ही झुक जाते,
हम भी जहर निरंतर पीये जाते।
इस जीवन की तार हुई चादर को,
आशा के धागे से सीये जाते।
उस गुमनाम शहर में जाने वालों,
"रैना" को भी साथ में लीये जाते। "रैना"

ume gujar di hmne

मुद्दत से तेरी यादों को सम्भाला है,
हमने अरमानों को बच्चे सा पाला है,
अफ़सोस तुझे ये बातें समझ नही आई,
तूने मेरे दिल का फूल मसल डाला है। "रैना"

शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

ekht hast lkiron ko

दोस्तों आप के लिए
ग़ज़ल
क्या देखे हस्त लकीरों को,
भाग्य सजदा करे वीरों को।
खुद पे विशवास नही तुझको,
हर रोज मनाये पीरों को।
जीवन का सफर नही मुश्किल,
सफल बना तू तदबीरों को।
तुझ में इतनी तो हिम्मत है,
तू बदल लिखी तहरीरों को।

आशिक रांझे बेमौत मरे,
दुःख मिलता बेबस हीरों को।
मेहनती जो धुन के पक्के,
वो बदले है तस्वीरों को।

"रैना" सबने रोना धोना,
सुख मिलता मस्त फकीरों को। ......."रैना"

dosto bahut hi pyari gazal

दोस्त जजों के समक्ष ताजा गज़ल
फैसला आप का गज़ल कैसी है।

बुझते शोलों को हवा दे गया कोई,
फिर से जीने की सजा दे गया कोई।
यू मुमकीन नही था मेरा बचना,
मुझको जीने की अदा दे गया कोई।
मरते मरते कम लोग बचा करते,
लगता है खास दुआ दे गया कोई।
देखो ऊपर वाला भी रोता है,
दोस्त दोस्त को दगा दे गया कोई।
"रैना" को सोना था लम्बी तान के,
क्यों उसको घर का पता दे गया कोई।।।।"रैना"

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

am jite hai

हम जीते है अपने दम से यारों,
गैरों की हस्ती पे नाज न करते।।।"रैना"

li bhi ab chamn men

सूरज का ढलना बाकी है,
राही का चलना बाकी है।
शाम ढली अन्धेरा भी है,
फकत शमा जलना बाकी है।
दिल के घर में अक्सर चर्चा
अरमान का पलना बाकी है।
मेरी तेरी मोहब्बत का ,
अब किस्सा बनना बाकी है।
रैना" बैठा सोचे अक्सर,
बस बर्फ पिगलना बाकी है,  "रैना"

sliye yuwa

इसलिये ही युवा जात परदेश को,
लूटते हैं मसीहा यहां देश को। ....."रैना"


 बेख़ौफ़ ही दिल पे जुल्म किया तूने,
न झुकी नजरों का सलाम लिया तूने।।।।।"रैना"

slman khurshid

मंत्री सलमान खुर्शीद जी???????
इतनी तो गौर करते???????????
आप की सरकार बैसाखियों के सहारे चल रही है,
और आप बैसाखियों पे ही हाथ साफ करवा गये।"रैना"

दोस्तों आप के दिल की ग़ज़ल

मैं सागर हूँ फिर भी प्यासा,
घेरे रहती फकत निराशा, 
समझे न सके मेरी पीड़ा,
इस तड़फन का राज जरा सा।
बदल गये इस जग के तेवर,
फिरता है इन्सान हताशा।
बूढ़ा बैठा सोच रहा है,
देगा मुझको कोन दिलाशा।
समझ किसे के आये नही है,
इस जीवन का खेल तमाशा।
देश के नेता फर्ज भी भूले,
घोटालों का होत खुलासा।
"रैना"शायद जागे किस्मत,
फिर इक बार तू फैंक पासा। .."रैना"

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

main sagar hu

घेरे रहती मुझको निराशा,
मैं सागर हूँ फिर भी प्यासा,
समझे न सके मेरी पीड़ा,
इस तड़फन राज जरा सा।
लिखने में तो गुजरी उमर तमाम है,
फिर भी लिखना आया न उसका नाम है।।।।।"रैना"

b to ham is

अब तो हम इस अंदाज में जीते है,
छाछ को फूंक मार के ही पीते है।  ....."रैना"


jindgi se kab gila

जीवन से न गिला है,
शिकवा किस्मत से है। "रैना"

fes book

गुमनामी के नाम कलम कर ही गया होता,
फेस बुक न होती "रैना" मर ही गया होता।।।।"रैना"

main gumnam mujhko

मैं बेनाम मुझे कोई जाने क्यों,
पर यारों ने मेरी कीमत डाली,
बेशक उसकी किरपा गुमनाम सरेआम हुआ है,
यारों की मेहरबानी "रैना"बानाम हुआ है।।।"रैना"

maine shayri ke bare

 शेर लिखेगे मैंने सोचा भी नही,
मुझको यारों ने शायर ही बना दिया। "रैना"

बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

man ke ghar men


आका के खिदमतदार रहे,
जो बख्शा शुक्रगुजार रहे।
कुछ पल तो चैन से भी काटे,
यूँ घोड़े पे न सवार रहें।
मिट्टी खोदन का काम करे,
हम इस चाहे उस पार रहे।
नमन मेरा देश के भक्तों को,
जो मरने को तैयार रहे।
"रैना"बैठा सोच रहा है,
हाये यार न अब यार रहे। ......."रैना"
सुप्रभात जी .................जय माँ अम्बे 

badl n jana

दोस्तों आप की खिदमत में इक और ग़ज़ल 
दोस्तों मेरे द्वारा पोस्ट ग़ज़ल शेर व्यंग्य ताजा लिखे जाते है,
कॉमेंट्स कर मेरा हौसला बढ़ाने पर आप आभार व्यक्त करता हूँ।

बदल न जाना आदत जैसे,
कायम रहना फितरत जैसे,
अरमान का क्या ये भी टूटे,
साथ निभाना हसरत जैसे।
इस से ज्यादा कह न सकेगे,
तुम तो लगते उल्फत जैसे।
पानी सर से गुजरे अब तो,
लगता आये कयामत जैसे।
"रैना" बेवजह तड़फता है,
होगा चाहे कुदरत जैसे। ......"रैना" 

ah mere desh

वाह मेरे देश के नेताओं?????????
तुमने आम जनता का दिल तोड़ा है,
तुम्हारी करनी पे शर्म आती है?????
बेशर्मों विकलागों को भी न छोड़ा है। "रैना"

papn

अपना मिजाज नही है ऐसा,
बेवजह तारीफ करे तो क्यों।  "रैना"

aapki kalam

आप की कलम के अंदाज ही कुछ ऐसे,
सच अल्फाजों से वाह टपकती है।।।।।।"रैना"

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

mera bhart mhan

मेरा भारत महान,
नेताओं ने कर दिया बेजान,
अब कैसी शान कैसा मान,
हर जगह हो रहा अपमान।

gmon se thodi

सुप्रभात के साथ एक प्यारी सी गज़ल

क्या खूब तेरी कुदरत है,
मुझ पे ख़ास ही रहमत है।
बेशक तुझसे न गिला कोई,
रोने की मेरी आदत है।
तूने सब कुछ ही बख्शा है,
तुझको मुझसे मोहब्बत है।
अब वो भी बैठा सोचे है,
बन्दे ने बदली फितरत है।
"रैना"अब भी सम्भल जा तू,
वरना आये तेरी शामत है। ....."रैना"
जय माँ अम्बे ....................

n ptthron se

मैं पत्थर से मोहब्बत क्यों न करू,
ये तो पी संग मिलन का माध्यम है। "रैना"



 धरती हैं हम आकाश को देख ख़ुशी होती,
शिकवा न कभी करते है अपनी किस्मत से। ....."रैना"

sham dle jab hogi

शाम ढले जब होगी रैना,
छम छम बरसें तेरे नैना।
सोचें गा फिर तू पछताये,
पिंजरे से जब उड़गी मैना।
वैसे तो बन्दा न बदलता,
पैसा कर देता है शैदा।
तोड़ न दिल को हिम्मत कर लें,
जीवन नदिया ने तो बहना।
वो ही खाने को भी देगा,
जिसने हमको किया है पैदा।
आखिर अन्धेरा छट जाता,
"रैना"का बस इतना कहना। "रैना"

सोमवार, 8 अक्टूबर 2012

ab se mai hisso me

जब से हिस्सों में बटने लगा,
तब से खुद से भी कटने लगा।
हिम्मत कर जब हाथ बढ़ाया,
फिर गम का बादल छटने लगा। ...."रैना"

beshak is jiwan me

बेशक इस जीवन में झमेलें बड़े है,
फिर भी सोचे आप कहां खड़े है।।।।"रैना"
सुप्रभात जी ........नमस्कार जी 

dekhe meri lachari

खुली कविता

दौरे महंगाई का असर देखे,
बच्चे बोले बीवी वो सब कहती है,
देखे मेरी लाचारी जेब भी मायूस रहती है।
महंगाई का असर इता ही पड़ा है,
जो चलता था सीना ताने,
वो सर झुकाये खड़ा है।
देखिये अब इस देश में हर कोई लाचार है,
बेईमान चोर उच्चके,नेता के घर बहार है।
अब जले भी तो कैसे दीप में न तेल है,
किस् से करे शिकायत सारा सिस्टम ही फेल है।
देखिये मसीहा कैसे अपना फर्ज निभा रहे है,
पैसे पेड़ पर नही लगते जनता को बता रहे है।
श्रीमान जी नेता ही देश को ठगते है,
अब जनता समझ गई है पैसे कुर्सी को लगते है।
सदन में भी अब न जनता का जिकर है,
अधिकतर नेताओ को स्विस बैंक का फिकर है।
उठो देशवासियों अपना फर्ज निभाओ,
वोट की चोट मार कर भ्रष्टाचारी नेताओं को भगाओ। ......."रैना"

वैसे चम्मचागिरी की कोई हद होती है,
मगर राजनीति में ?????????????
चम्मचागिरी की कोई हद नही होती,
ऐसे हमारे नेता दिखा रहे,
तभी तो दर्द जीजा जी के पेट में?????
गोलियां साले खा रहे है। ................"रैना"

chamchgiri ki had

वैसे चम्मचागिरी की कोई हद होती है,
मगर राजनीति में ?????????????
चम्मचागिरी की कोई हद नही होती,
ऐसे हमारे नेता दिखा रहे,
तभी तो दर्द जमाई राजा के पेट में?????
गोलियां साले खा रहे है। ................"रैना"

kyo firda bneya mast malg

दोस्तो  चिंतन करने को सूफी गीत,

बना फिरता तू मस्त मलंग,सोच लें ये भी है होना,
महबूबा जब लेने आये,फिर लम्बी तान के सोना।
महबूबा जब लेने आयेगी  ..................................
यहाँ तो रोने हंसने में ही लगी ये सारी खुदाई हैं,
करते है झूठ की खेती कहने को नाम कमाई हैं,
हाय हमें किस्मत ने मारा,सब का यही रोना है।
महबूबा जब लेने आयेगी ...............................
बेशक बहुत खुली दुनिया मगर दिल हुआ छोटा,
वक्त आ गया ऐसा अब तो चलता सिक्का खोटा,
तू तो उसको याद रखना जमाने सा नही होना।
महबूबा जब लेने आयेगी ..............................
साजन से किये वादे कसमें तू भूल नही जाना,
मोह माया के झूले में बैठ के झूल नही जाना,
"रैना"ये दस्तूर जीवन का कुछ पाने को खोना।
महबूबा जब लेने आयेगी ............................."रैना"

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

jab saajan se hoggi

सूफी गीत

जब साजन से होगी आँखे चार,
शर्म से होये पानी पानी।
अब भी कर लें सोच विचार,
औ बन्दे तू छोड़ नादानी।
ओ बन्दे छोड़ ..................
मोह माया के नाग ने डसा है,
अपनी बनाई दलदल में धसा है,
इससे बाहर तू निकल न सकता,
चारों और घेरा तू बीच में फसा है,
अब निकल लें इस से बाहर,
दो दिन की जिंदगानी।
ओ बन्दे छोड़ ..................
तू गंगा नहाये कांशी जाये,
मन को फिर भी चैन न आये,
इससे मुक्ति नही मिलेगी,
ये भला तुझे कौन समझाये,
उसके बन्दों को करले प्यार,
"रैना" पे फिर करे मेहरबानी। ......."रैना"

rajnitik partiyon ke liye

राजनितिक पार्टियों के तो गर्म सी बात है,
आम जनता के लिए तो ये नर्म सी बात है,
मगर देश की सबसे पार्टी की अध्यक्ष??????
के दामाद रबार्ट वाड्रा के लिए ये शर्म की बात है,
सिर्फ तीन सौ करोड़,
पार्टी के नेता वाड्रा से कहते??????
दिल दिया है तोड़,
सिर्फ तीन सौ करोड़,
हमारी पार्टी के नेता
हजारों लाखों करोड़ डकारते है,
एक छींक भी न मारते है।
और वाड्रा तेरा तीन सौ करोड़ से फटा जा रहा है।
कुछ नेता सोच रहे हैं,
वाड्रा को राजनीती सिखायेगे,
कलमाड़ी को इस का गुरु बनायेगे।
ताकि कलमाड़ी वाड्रा को समझाये???????
हजारों करोड़ कैसे कमाया जाये।
और कहाँ छुपाया जाये।
क्योकि ये तय है अभी तो हाथ न डालेगे,
आगे चल कर तो पार्टी को वाड्रा ही संभालेगे।
क्योंकि वाड्रा जी पार्टी के दामाद जो ठहरे।  ......"रैना" 

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2012

meri maa ki

हैं मेरी माँ की दुआ जैसे,
सच दोस्त मेरे खुदा जैसे।  .."रैना"
 
मेरे यारों ने ही ये काम किया,
इक गुमनाम सरेआम किया। "रैना"

maa ki duaa hai

दोस्तों दिल की बात

अब तो मौसम सर्द बहुत है,
हर सीने में दर्द बहुत है।
लगता कोई मजबूरी है,
हर मुख पीला जर्द बहुत है।
सांस लेना अब मुश्किल है,
उड़ती हवा में गर्द बहुत है।
मैं मुफलिस उसको क्या लेना,
यूँ "रैना" हमदर्द बहुत है। ..."रैना"
 



aatishe ishak men

 इश्क की आग में तप के बल को मिटाना है,
सोच लिया हमने अपने घर को जलाना है।
मैं मैं जिसके भी सिर पे चढ़ के बोले है,
 उसके कदमों में न उसे मिलता ठिकाना है।
अब तो इन्सान हुआ गिरगट से भी माहिर,
दिल तो इस और कहीं नजरों का निशाना है।
जिस और चली जाती है ये दुनिया सारी,
"रैना" को भी इक दिन उधर चले जाना है। 

tum is shahar me

सूफी गीत
तुम इस शहर में आये कुछ कमाने के लिये,
याद रखना वक्त मुकर्र,यहाँ से जाने के लिये।
तुम इस शहर में .......................
हैं बहुत अरमान जवान तेरी हसरते रहती,
लूट ले तू मौज बहारें ये ही दिल की कहती,.
है तू बेताब बहुत सबकुछ लुटवाने के लिये।
तुम इस शहर में .......................
अभी तो गौर नही याद आयेगी शाम ढले,
कोई भी न पुकार सुने तन्हा बैठे हाथ मले,
शर्म के मारे लव न खुले दर्द सुनाने के लिये।
तुम इस शहर में ......................
"रैना"अब भी वक्त है हसीं ये पल न गवा,
जो साजन तेरा उसका तू दीवाना हो जा,
फिर वो खुद आये चमन महकाने के लिये। ..."रैना"


जो थे अंग्रेजों के पीठू
उनको हासिल हुआ है राज,
जो भारत माँ के दीवाने थे
उनको हासिल मौत का ताज,
भारत में यही हो रहा है आज।
प्रत्यक्ष को प्रमाण की?????
 जरुररत नही होती ह्ह्ह्हह "रैना"
जय माँ भारती।।।।।।।।।।।।।

बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

aaj koi bhi n ghar

दोस्तों की पसंद की ग़ज़ल,

 आज कोई भी न घर में है,
सारा शहर लगे सफर में है।
गौर तुझको क्यों नही अपनी,
तू किसी के दिल नजर में है।
बात अपनी हम करे कैसे,
दर्द मेरे भी जिगर में है।
चेहरे पर झलकती मुशिकल,
आदमी डूबा फिकर में है।
तोड़ ले "रैना" सितारों को,
सच इती हिम्मत बशर में है। ......... "रैना"