शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

uthho bhartwasiyo dusri

उठो भारतवासियों,
आजादी की दूसरी लड़ाई के लिए तैयार हो,
एक हाथ में फूल तो दुसरे हाथ में तलवार हो,
जो देशभक्त इमानदार फूल उसे पकड़ाया जाये,
भ्रष्टाचारी गद्दार को तसल्ली से मजा चखाया जाये.
रैना" ये तो हम सब जानते है,
लातों के भुत बातों से कब मानते है."रैना" 

aam aadmi me

आम आदमी में देशभक्ति का जज्बा नही होता."रैना"

बुझदिलों की बस्ती पर गीदड़ राज करते है."रैना"

अन्ना न हारा है,न ही हारेगा,
जबतक
उसकी साँस में साँस है,
वो पुकारेगा,
भारत माता की जय,
मगर अब देखना ये है,
 क्या हमने मान ली हार,
जो मान ली हार तो,
भ्रष्टाचारियों के कदमों में शीश झुकायो,
और उनकी शान में नारें लगाओ,
अपनी इज्जत लुटवाओ,
फिर इज्जत लुटवाने में क्या शर्म है,
क्योकि पूंछ हिलाना तो बुझदिलों का कर्म है.
जय माँ भारती ....................भारत माता की जय."रैना"

दिल के आस पास तेरी यादों की खुशबू महके,
मेरे जीवन की बगिया में अब सिर्फ तूं महके.
चाहे तुम बिछुड़ कर चले गये बहुत दूर रैना"
फिर भी अहसास तू हरपल मेरे ही रूबरू महके. "रैना"

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

anna ne foda aesa

कुछ लोगों का तर्क है,
अन्ना जी के पीछे भीड़ कम है,
अरे मूर्खों
अन्ना ने फोड़ा ऐसा बम है,
जागी है देश की जनता,
नेताओं का रुका दम है.
ये क्या कम है.
अन्ना जी देश भक्त सच्चे है,
हमारे लिए लड़ रहे,
उनके अपने न बच्चे है.
देश के नेताओं को नही है शर्म,
सदन में देख लिया उनका कर्म.
अब तो हमें आगे आना चाहिये,
अपने देश को गद्दारों से बचना चाहिये."रैना"

taumar kitabe

ता उम्र किताबे पढ़ते रहे ये फिर भी समझ नही आया,
इस रंग बिरंगी दुनिया में,मैं क्यों आया तू क्यों आया.
जगत के सच्चे मालिक ने देखो अजब लीला रचाई है,
उसके विधि विधान को तो कोई भी समझ नही पाया.
इन्सान को उस जादूगर ने चक्करों में है डाल दिया,
किस घर में उसका डेरा पता उसने न अपना बतलाया.
"रैना" उम्र गुजार सेवा में हो साफ स्वच्छ नीयत नीति,
फिर पूरा हो जाये तेरा मकसद इसलिए तू यहाँ आया.
सुप्रभात जी ..................................good morning.

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

jb bhi hote hai

जब भी होते तेरी यादों के रूबरू,
बहुत सोचते बेवफा हम है के तू.
बाद मुद्दत के  बरकरार बेकरारी,
हसरत तमन्ना वही है जुस्तजू.
बिछुड़ के तुझसे ये हुआ हासिल,
मैं को छोड़ करने लगे है तू ही तू.
बेशक आतिशे इश्क में तप कर,
"रैना" हो गया है खरा सोना सुर्खरू."रैना"

jab se hmne

जबसे जिन्दगी से प्यार हुआ है,
हर लम्हा गुले गुलजार हुआ है.
अब खिंजा का कोई फिकर नही,
यूँ चमने जिन्दगी बहार हुआ है.
फकत अभी तो हुआ है एहसास,
महबूबे हसीं का न दीदार हुआ है.
पैगाम आयेगा तो जाना पड़ेगा,
कोई भी जाने को न तैयार हुआ है.
रैना"उसका डूबना तो तय होता,
दो कश्तियों पे जो सवार हुआ है."रैना"

is desh me bujhdilo

भारत देश में नेताओं की मौज बड़ी है,
क्योकि यहां बुझदिलों की फ़ौज बड़ी है.
जो खुद तो घर से बाहर नही आते है,
जो प्रयासरत उसका मनोबल गिराते है.
हमारे लिए दूसरा लटके जाये फांसी पे,
हम अक्सर यही योजना तो बनाते है.
अन्याय के खिलाफ उठना हमारा फर्ज,
हमारे धार्मिक ग्रन्थ हमें ये समझते है.
"रैना" बुझदिलों की कही भी कदर नही,
 वो जिन्दा लाश कही इज्जत न पाते है."रैना"
सुप्रभात जी .........................good morning ji

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

jha kharke n bartan

जिसमें परेशानी न हो वो सफर कैसा,
जहां खड़के न बर्तन फिर वो घर कैसा.

लिखने में गुजर दी मैंने उम्र तमाम,
फिर भी लिखना आया न उसका नाम."रैना"

तुम क्या जानो एक तिनके की एहमियत,
उस पंछी से पूछिये जो घोसला बना रहा है."रैना"

kirayedaro pe

किरायेदारों से मेरा दिल निराश है,
घर के असली मालिक की तलाश है."रैना"
वाह अंदाजे जमाना??????????
जो लड़की पैदा नही हुई,
वो करोड़ो अरबों खर्च कर बचाई जा रही है,
जो पैदा हो गई
उसकी मंडी में बोली लगे जा रही है,
कोठे पर नचाई जा रही,
दहेज की बलि जा रही है,
क्या इसलिए लड़की बचाई जा रही है."रैना"  

aankhon se nirntar

आँखों से निरंतर बरसे बरसात है,
मत पूछ ये दिल का मुआमलात है.
इश्क का पहाडा तो बड़ा मुश्किल,
एक दो तीन इसमें पांच न सात है."रैना"

tute ptto ko

टूटे पत्तों को उड़ा कर हवा सोचने लगी वो तूफान हो गई."रैना
बदला मिजाज मौसम का असर या बदगुमानी."रैना"

आप को चाहे फुरसत न मिले मगर मैं शाम ढलने तक इंतजार करुगा."रैना"

मेरी बेबसी मेरे चहरे पर झलकने लगती है,
वैसे मैं हंसने का प्रयास तो करता हूं"रैना"

रविवार, 25 दिसंबर 2011

देश प्रेमियों के लिए खास रचना 

सोय मन में आजादी की अलख जगाने का,
अब फिर वक्त आ गया है,
भारत माँ को आजाद करवाने का.
बेशक गौरे अंग्रेजों को हमने भगा दिया,
मगर काले अंग्रेजों ने माँ को बंदी बना लिया.
काले अंग्रेजों से माँ को छुडवाने का.
अब फिर वक्त आ--------------------
छीना झपटी,लूट मार नंगा भ्रष्टाचार है,
द्रोपदी का चीर हरण होता बीच बाजार है,
दुशासन से द्रोपदी को बचाने का.
अब फिर वक्त आ---------------
मतलब के दरिया में सारे असूल बह गये,
भाषणों तक सीमित अब हमारे नेता रह गये,
ऐसे झूठे नेताओ को सबक सिखाने का.
अब फिर वक्त आ-----------------
माँ की आबरू पर कई वार हो गए,
देश के मसीहा ही गद्दार हो गये,
बेनकाब कर गद्दारों को भगाने का.
अब फिर वक्त आ--------------
रोती बिलखती माँ मेरी खड़ी की खड़ी रह गेई,
रामराज्य की कल्पना धरी की धरी रह गेई,
शहीदों के सपनों का देश बनाने का.
अब फिर वक्त आ -------------
उठो वीर जवानों भारत माँ की पुकार सुनो,
रंग लो बसंती चोला और आजादी की राह चुनो,
"रैना" अपने कदम पीछे नही हटाने का.
अब फिर वक्त आ---------------"रैना"

kahe kart hai deri

भटक रहा काहे धक्के खाये सुन ले अर्ज तू मेरी,
पल पल निरंतर पिसता जाये काहे करत है देरी.
यहां तो दिन समस्त उजियारा जो चाहे तू पा ले,
वहां तू कुछ भी कर नही पाये काली रात अँधेरी.
काये तू अभिमान करे है तेरा नही कुछ भी कोई,
ठोकर लगी  गिर जायेगी जीवन मिट्टी की ढेरी.
घड़ी पल दिन में दिन महीने साल गुजरते जाये,
कर ले जतन "रैना" ख़त्म हो आन जान की फेरी. "रैना"
सुप्रभात जी ...................good morning ji

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

soniya lali

जनलोक पाल बिल पे,
अपने कारनामों की वजह से,
पहले भड़के लालू, मुलायम भैया जी,
अब भड़की सोनिया लाली है,
पहले लगता था दाल में काला,
अब लगता सारी दाल ही काली है.
जनतंत्र पर हो गया नेता तंत्र भारी,
जनता के हिस्से महंगाई तंगहाली है."रैना"


tane

ताने जमाने के क्यों हो तुम सहते,
मेरे दिल के घर में क्यों नही रहते,
मेरे दिल का घर महल आलीशान,
आँगन में प्यार के झरने है  बहते. "रैना"

jmane ke tane

इस कद्र जमाने के ताने भला क्यों तुम सहते,
मेरे दिल का घर खाली इस में क्यों नही रहते.
"रैना"मेरा दिल का घर तो महल आलीशान है,
मस्त नजारा मुसल्सल प्यार के झरने बहते."रैना"

har tarf khushi mahkai

आज हर तरफ ख़ुशी हुई आबाद दोस्तों,
ये शुभ दिन सबको मुबारखबाद दोस्तों.
सब की मुराद पूरी हो रंज न रहे मलाल,
"रैना की उस मालिक से फरियाद दोस्तों."रैना"
सुप्रभात जी .................good morning

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

dastur jmane ka

कसूर नजरों का सजा दिल को मिली है,
ये दस्तूर जमाने का,
करता कोई और भरता कोई और है."रैना"

aek buda

एक बूढ़ा
हमें जगा रहा है,
हमारे भविष्य को कवच पहना रहा है,
मन में देश प्रेम की अलख जला रहा है.
त्याग तपस्या क्या होती करके दिखा रहा है.
अब वो हमें बुला रहा है तो हमें जाना चाहिए,
क्योकि वो अपने लिए कुछ नही कर रहा,
हम भी जानते सिर्फ हमारे लिए  लड़ रहा.
फिर ये भारत की संस्कृति है की हम बुजुर्गों का,
आदर मान करते है,सम्मान करते है.
ये भी इतिहास गवाह है,
देश हित में जब भी किसी ने बीड़ा उठाया है,
तो बच्चा बच्चा घर से बाहर निकल आया है.
इसी दम से हमने गौरे अंग्रेजों को यहां से भगाया है.
आओ हम सब मिल अन्ना जी के कदम से कदम मिलाये,
काले अंग्रेजों का अस्तित्व मिटा कर
भारत देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाये.
भारत माता की जय, यही पूजा आरती, जय माँ भारती.........."रैना"

kanto se lga

काँटों से लगा ताउम्र निभा जायेगे,
फूलों का क्या पल में मुरझा जायेगे."रैना"

maa ne ghar se bheja tha

गौर फरमाये जी, मेरी बेबसी ????????
पिता जी ने घर से समझा कर भेजा था,
बाजार से कुछ लाने के लिए,
मैं बाजार की चकाचोंध देकर सब भूल गया,
कुछ और ही खरीदने लगा."रैना"

beshak sham ka surj

मेरी जब से मिली तुझसे नजर है,
मुझको अपनी न कोई भी खबर है.
मैं तो वैसे ही बेकार भटक रहा था,
समझ आई यहां वहां तेरा ही घर है."रैना"

chirag ki tarh jal kar

शमा की तरह जल कर,
महफ़िल को रोशन करने की सोचिये,
परवाने की तरह जल कर मरना बुझदिली है."रैना"
सुप्रभात जी .............................good morning
मैं अपनी धुन का पक्का अपने आप में खोया रहता हूँ,
आप इस काबिल वर्ना मैं न किसी को वाह वाह कहता हूँ."रैना"

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

kalmadi bula rha hai

कलमाड़ी बुला रहा है, सीटी बजा रहा है,
चिताबरम जल्दी आओ जी घबरा रहा है."रैना"

chahe vo bahut dur

चाहे वो लाख कोस दूर चले जाते है मगर दिल में बसने वाले याद बहुत आते,"रैना"

ये तो सच है लोग भी कहते है,बेवफा लोग तो खुदा से दूर रहते है,"रैना"

तुम उम्र दराज की बात न करो तेरे गम में सूरज ढलने लगा है."रैना"

मेरे शहर के लोग भ्रम में रहने लगे,
खुद को खुदा से ही जुदा कहने लगे है."रैना"

mere dil ki tang galiyo se

मेरे दिल की तंग गलियों से यूँ न गुजरिये,
देखो वक्त बदल रहा  कुछ तुम भी बदलीये.
हमने तो मान ली है बुजुर्गों की नेक सलाह,
बेशक हम तो संभल गये तुम भी संभलिये.
वैसे अच्छी नही होती है इस कद्र तल्खियाँ,
फरेबी इस जमाने को धीरे धीरे ही समझिये."रैना" 
हमारे मुहु से  हंसी के फुहारे ही छूटने लगे है,
जब से हमें पता चला वो दिल से पूछने लगे है."रैना"

neto ko aelrji

लालू,मुलायम को तो,
अपने कारनामों की वजह से लगी मिर्ची है,
मगर सोनिया गाँधी,
जनलोक पाल बिल को लेकर क्यों भड़की है,
कही सोनिया जी ने,
इन नेताओं का झूठा तो नही पीया है,
कोई बड़ा घोटाला करवाया या किया है.
मैडम जी गुस्सा न करो जनलोक पाल बिल आने दो,
इन नेताओं ने बहुत मलाई खाई है,
अब इन्हें जेल की हवा खाने दो............."रैना"
भारत माता की जय...............................

तुझसे बिछुड़ने का गर गम करते तो ये तय हस्ती मिट गई होती."रैना",

aankho ko nam nhi


आ के ख्वाबों में न सता,
मुझको भूल जा भूल जा.
मैंने हार अपनी मान ली,
तुम बावफा मैं हूँ बेवफा.
अब जमाने का दस्तूर ये,
बदले वफा के मिले जफा.
दिल के शो केश में रखे है,
गम तूने जो किये है अता.
मर्जी तेरी गम दे या ख़ुशी,
तेरी रजा में "रैना"की रजा.

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

tum tum ho kuchh bhi

तुम तुम हो कुछ भी कह सकते,
हम तो हम है चुप ही रह सकते.
गम सहने के आदी हो गये हम,
बांध बांधा आंसू नही बह सकते.
जुदाई का गम मौत से बढ़ के है,
मगर हम ये गम भी सह सकते.
अब तो लोग रेत के घरों में रहते,
ये घर तो कभी भी है ढह सकते.
तू चाहे जितने मर्जी गम दे यारा,
"रैना"तुझे कुछ नही कह सकते."रैना"

tum tum ho kuchh bhi

तुम तुम हो कुछ भी कह सकते,
हम तो हम है चुप ही रह सकते."रैना"

kaise btau

हमें मिलने वाले गम कुछ निराले हैं,
दिखाऊ कैसे  दिल पे कितने छालें हैं.
हमारी हिम्मत देखों हार नही मानी,
गम तो हमने मेहमान से संभाले है,
जमाने की फितरत समझ नही आई,
खिलते हसीं चेहरे दिल के तो काले है.
यही सच वो उसी को काटते अक्सर,
ये काले फनियर नाग जिसने पाले है.
रैना"जिनकी नीयत नीति है अच्छी,
बेशक उनके घर में ही होते उजालें है."रैना"

TU N SHI TERI YAD

तू न सही तेरी याद सहारे के लिए,
इतना काफी है मेरे गुजारे के लिए.
मझदार कभी साहिल के करीब डूबे,
यूँ कश्ती रवा होती किनारे के लिए.
खुदा की मर्जी हुआ हो गया हादसा,
हम घर से निकले थे नजारे के लिए.
"रैना" मेरी नीयत पे शक न करना,
 जान दे सकते अपने प्यारे के लिए."रैना"

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

beshak kohra ghna

मेरे ख्वाबों के शहर में जलजला आ गया है,
आबाद इक बस्ती को खंडहर बना गया है.
मंजर बरबादी का मुझ से देखा नही जाता,
जिन्दगी की राहों पे घना अँधेरा छा गया है.
दिल के आंगन में बिखरी यादें निशानियाँ,
बहुत रोये जब ख़त पुराना हाथ आ गया है.
घर रोशन करने के लिए जलाया था चिराग,
"रैना"वही चिराग तो मेरे घर को जला गया है."रैना"

dil to man jayega

दिल मन जायेगा जरा कोशिश तो करो,
ऐसा लगता तुम्हारे जज्बात है बहके हुए."रैना"
बेशक जीने का तो सिर्फ ढोंग है करते.
वैसे अब इन्सां दिन में कई बार मरते.
अपनी जिन्दगी से बहुत तंग आ चुके,
शहर के लोग मौत से तो कम ही डरते."रैना"
आज जब उनका सामना हुआ है,
ऐसा लगता कोई हादसा हुआ है.
ये बात हमें समझ नही है आई,
वो इस कदर क्यों खफा हुआ है.
मेरे रकीब की हंसी रोके न रुके,
लगता उसे खास फायदा हुआ है.
जबसे दिल उसका दीवाना हो गया,
बेशक "रैना" खुद को भुला हुआ है."रैना"

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

badle wqt ka asar

बदले वक्त का असर अब दिखने लगा है,
इन्सान कोडियों के भाव बिकने लगा है.
फैशन के दौर में सब कुछ ही जायज है,
मर्द भी अब औरत सा ही दिखने लगा है
अपने दिल की भड़ास निकलने के लिए,
आजकल हर कोई ही शेर लिखने लगा है.
कल तलक कायम रखी अपनी हकुमत,
मगर अब शौहर बीवी से ही पिटने लगा है.
रैना वहां की भी कुछ तो कर ले फिकर,
देखो धीरे धीरे अब सूरज छिपने लगा है."रैना"

diware bahut hili magar

दीवारे नही अब तो हमें नींव हिलानी है,
हर दिल में देश प्रेम की अलख जगानी है.
वोट हथियाने को नेता जो करते है खड़ी,
हर हाल वो नफरत की दीवार गिरानी है.
बच्चे सुनने को बेताब शहीदों की कहानी,
फिर गहरी नींद में क्यों सोई हुई नानी है.
नारी को अब अबला कहने की भूल न करे,
भारत देश की हर नारी झाँसी की रानी है.
माँ से धोखा करने वाले कुछ गद्दार भी है,
बेशक उनके मंसूबों पे अब फेरना पानी है.
"रैना"तेरी नसीहतों का कुछ असर होगा,
वैसे आजकल ये दुनिया बहुत सयानी है."रैना"

रविवार, 18 दिसंबर 2011

ghode to bechare

बेचारे घोड़े तो बोझ खींचते खींचते मरते है,
भारत देश में हरी हरी घास तो गधे चरते है.
देखो नेता पहने फिरते है बुलेट प्रूफ जैकेट,
सीमा पे जवान बिना जैकेट के जंग लड़ते है.
जिस प्रकार मासूक करती महबूब से धोखा,
इसी प्रकार ये  नेता जनता से धोखा करते है.
भ्रष्टाचार करने में कुशल प्रवीन होते माहिर,
नेता न जाने कोन से कालेज में ये पाठ पढ़ते है."रैना"

gar tum

गर तुम दिल का दर्द समझ जाते,
फिर हम तन्हाई में आंसू न बहाते.
काश तुम पहले ही इशारा कर देते,
फिर हम सपनों का महल न बनाते.
सियासतदानों से जैसे तुम्हारे तेवर,
खूब गिरगट की तरह रंग बदल जाते.
चाहे तू लाख छुपा ले अपने ऐब "रैना"
मगर उसकी नजर से बच नही पाते."रैना"


शनिवार, 17 दिसंबर 2011


चल जरा अपनों से संभल के,
वरना रह जायेगा हाथ मल के.
गम की आग से नही घबराना,
देखो सोना निखरता है जल के.
हिम्मत से ही सब होता हासिल,
दिखाना है किस्मत को बदल के.
परवाने को देखिये बेमौत मरता,
बुझदिल लिपटे शमा से मंचल के.
"रैना" तेरी मजबूरी है ये भी जरूरी,
चलना पड़ेगा वक्त के सांचे में ढल के."रैना"

o chlna apno se sambhl ke

चल जरा अपनों से संभल के,
वरना रह जायेगा हाथ मल के.
गम की आग से नही घबराना,
देखो सोना निखरता है जल के.
हिम्मत से ही सब होता हासिल,
दिखाना है किस्मत को बदल के.
परवाने को देखिये बेमौत मरता,
बुझदिल लिपटे शमा से मंचल के.
"रैना" तेरी मजबूरी है ये भी जरूरी,
चल चला चल वक्त के सांचे में ढल के."रैना"

   

apne kya begane

अपने क्या बेगाने सब झूठे,
मौका लगते ही बेख़ौफ़ लूटे.
चमकते को तो देते सलामी,
हाल न पूछे जब सितारा टूटे.
हुस्न वालो की बात क्या करे,
करते गुमान बात बात पे रूठे.
"रैना" डूबा साहिल के करीब,
क्या करे उसके तो भाग्य फूटे."रैना"

prabhu ka dhyan

प्रभु का ध्यान करले जीवन सवंर जायेगा,
वरना यहां भटके जैसे वहां धक्के खायेगा.
संभाल के रख ले चाहे जितना भी खजाना,
बेशक एक भी आन्ना तेरे साथ न जायेगा.
चलती जो सांसें तेरे सारे संगी साथी  प्यारें,
टूटते ही सांसें ये सारा खेल ही बदल जायेगा.
रैना"चौबीस घड़ी दो घड़ी ही उसके नाम की,
नाम की कश्ती पे बैठ भवसागर तर जायेगा. "रैना"
सुप्रभात जी .....................good morning ji 

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

jo apna bhla chahte ho

अपना भला जो चाहते हो,भूल के भी न सच बोलो,
ये बेईमानों की बस्ती है बेहतर होगा के कम तोलो,
अब ये दस्तूर जमाने का माहिर हो फरेब करने में,
आँखों से निकले न आंसू पानी लगा पलकें भिगो लो.
अब ये भी अदा जमाने की चमत्कार को नमस्कार,
जनता बन जाती है बेवकूफ सपनों का स्टोर खोलो."रैना"
,

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

dil ka ghar

बेशक तेरे जाने के बाद मैंने घरौदा तोड़ा नही है,
मगर किसी और के रहने काबिल छोड़ा नही है,
इक बार ठोकर खा के गिरा बहुत ही डर गया हूँ,
तन्हा रहता हूँ रिश्ता किसी और से जोड़ा नही है."रैना" 

paise ki diwani,

पैसे की दीवानी एकदम दुनिया सारी,
आशिक देखो अब तो  बने है व्यापारी,
मर्यादा में पुरुष न जब तोड़े हदें सारी,
फिर भला क्यों पीछे रह जाये गी नारी.
कल युग का असर सच हारे झूठ जीते,
बेईमानी के आगे फीकी पड़ी ईमानदारी.
अब बेटे की परेशानी हो गई बूढ़े माँ बाप,
अपने साथ नही रखती पत्नी प्राण प्यारी.
महंगाई हिरनी जैसे अब लगती छलांगे,
जनता सिर पीटे निकम्मी सरकार हमारी.
बिन पैसे अब तो नौकरी नही है मिलती,
"रैना" भूखा मरेगा बच्चे कर अब दिहाड़ी."रैना"
        

jis se bhi puchh tere

 पूछते है जिससे भी तेरे घर का रास्ता,
 वो हमें देने लगता अपने घर का वास्ता.

जो भी पीते शराब को पानी की तरह,
वो तो जिन्दगी से न मोहब्बत करते,
रिंद मस्ती में सब कुछ ही भुलाये बैठे,
बेफिक्र देखो मौत की है दावत करते.
न उसके घर का पता न मंजिल का,
डोले मझदार में पता नही साहिल का,
अब बनाये हमने वक्ता अपने मुरसद,
पीर वो पैसे के कहने को इबादत करते."रैना"



jis se bhi puchh tere

 पूछते है जिससे भी तेरे घर का रास्ता,
 वो हमें देने लगता अपने घर का वास्ता.

जो भी पीते शराब को पानी की तरह,
वो तो जिन्दगी से न मोहब्बत करते,
रिंद मस्ती में सब कुछ ही भुलाये बैठे,
बेफिक्र देखो मौत की है दावत करते.
न उसके घर का पता न मंजिल का,
डोले मझदार में पता नही साहिल का,
अब बनाये हमने वक्ता अपने मुरसद,
पीर वो पैसे के कहने को इबादत करते."रैना"



रविवार, 11 दिसंबर 2011

hmne gilla karna n jayj

हमने गिला करना न जायज समझा,
वो हमे लूटते रहे खुदा का नाम लेकर."रैना"

जागो भारतवासियों अब तो सोने का वक्त नही,
शांतिपूर्ण आहिंसक अंदोलन हो बहाना रक्त नही,
मेरी माँ भारती की भी यही तो करुणा भरी पुकारहै,
चैन न ले जबतक जनलोक पाल बनता शसक्त नही."रैना"

usse ik bar

मैंने उससे इक बार तो पूछना जरुर है,
आखिर मेरी जिंदगी में क्यों न सरूर है,
मेरी चीख कही तुझ को परेशां न कर दे,
लगता इस लिए तू तो बैठा जा के दूर है.
वैसे हर महफ़िल में होती तेरी ही चर्चा,
बेशक सारे शहर में तू बड़ा ही मशहूर है.
मुझसे फेर ली है क्यों तूने अपनी आँखें,
मैंने  ये मान लिया तू ही तो मेरा हजूर है.
"रैना"वो चाहने वालो का  लेता इम्तहान,
मेरे मौला ये बता तेरा क्या यही दस्तूर है."रैना"

apne to nsib hi

बेशक इन्सान के नसीब अक्सर रुठते हैं,
ऐसे भी पत्ते जो पीले होने से पहले टूटते हैं
किसके पास जा करे हम इनकी शिकायत,
ये हुस्न वाले तो बीच बाजार में ही लूटते है.."रैना"

बेशक मेरी बीवी मुझ से बहुत डरती है,
इसलिए तो बेलन का प्रयोग करती है."रैना"

मेरी मजबूरी का फायदा उठाते रहे,
मैं रोता रहा वो हंसते मुस्कराते रहे."रैना"



शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

mai bolu tu bole

मैं बोलू तू बोले,
ये बोले वो बोले
आओ मिल कर सारे बोले,
जय भोले  बाबा बम भोले
जय भोले बाबा बम भोले...........रैना"................... 

tujh se bichhudne ke bad

तुझसे बिछुड़ने की सोच भी नही सकता,
मुझे खबर ???????
 जिस्म से जान जुदा होगी तो क्या होगा."रैना"

दिल का तेज धड़कना,
सांसों का यूँ अटकना,
नींद का न आना,
यूँ ही दिल घबराना,
मर्जे इश्क के शुरू के लक्ष्ण है.
ये मेरा तजुर्बा है...................."रैना"

दिल का तेज धड़कना,
सांसों का यूँ अटकना,
नींद का न आना,
यूँ ही दिल घबराना,
इश्के मर्ज के शुरू के लक्ष्ण है.
ये मेरा तजुर्बा है."रैना"

ye koi kyo lut kar

कोई क्यों लूट कर ले गया मेरी पतंग को मैंने पेचा लड़ाया ही न था."रैना"

ढलती शाम को देख कर मेरी आँख के चश्में बहने लगे."रैना"

हम एक इन्सान को पूजते रहे मगर वो नही पिघला,
काश वो पत्थर होता तो पिघल जाता."रैना"

खैर अब मुझे ये एहसास होने लगा है की उसके दम से ही मेरा दम है."रैना"

मौत तो निश्चित है मगर यादों के दम से कुछ दिन निकल रहे है."रैना"

गिर के संभल सकता हूँ,
 मैं उठ के चल सकता हूँ,
 एहसान नही किसी का,
इन्सान हूँ बदल सकता हूँ."रैना"   

koi bhi rasta khi

ख़त्म हो कोई रास्ता ये नामुमकिन नही मुश्किल है,
मुश्किल हो सकती आसान मगर जमाना संगदिल है."रैना"

मौसम की तरह बदलते इन्सान अब अपनी सुरत भी भूल जाते है."रैना"

खिजा के मौसम में भवरें चमन में गुनगुनाते नही."रैना"

जब हकीकत से मेरा हुआ सामना तब मुझे खबर हुई तुम बेवफा हो."रैना"

इन्सान ताउम्र सीखता मगर फिर भी,
 सीखने को बहुत कुछ बाकी रह जाता है,
और इन्सान अलविदा कह जाता है."रैना"   

ja uske phlu me

जब उसके पहलू में ही मरना है,
फिर दुःख का जीकर क्यों करना.है."रैना"

खुदा का शुक्र है अरमान हिस्सों में बंटे,
वैसे अक्सर अरमान टूट कर बिखर जाते है.

वो कभी भी किसी के नही होते,
जो लम्बी तान के बेफिक्र सोते."रैना"

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

jai maa bharti

जय माँ भारती,
ढूंढ़ रही सारथी,
कश्ती डोल रही,
हवा दम तोल रही,
घनघोर अँधेरा है,
गद्दारों ने घेरा है,
ख़ामोशी उदासी है,
हर आँख प्यासी है,
दीन न ही  धर्म है,
बदल गया कर्म है,
बचा न इमान है,
हो गया बेईमान है.
ऐसे न ही वैसे की,
भूख है बस पैसे की,
बेईमान नेता है,
कुछ नही  देता है,
सब लेता ही लेता है,
बाप जैसा बेटा है.
अर्ज करे माँ भारती,
जवानों बनो सारथी,
यही पूजा आरती,
बनो न जी स्वार्थी.
कश्ती बाहर निकलो,
देश को अब सम्भलो.
"रैना"देश को संभलो. "रैना"
सुप्रभात जी ...........good morning 

do pato ke bich pis

पेशे खिदमत एक हास्य कविता अपने विचारों से अवगत जरुर करवाए.

जब से हुई शादी तब से निरंतर घिस रहा हु,
यूं कह सकते है दो पाटों के बीच पिस रहा हूँ.
बीवी को पूछता हूँ तो माँ झाड़ती है,
माँ को पूछता हूँ तो बीवी बेलन से मारती  है.
दिल का हार्न अब बिलकुल न बजता है,
खाया पीया शरीर को जरा न लगता है.
घर में कलह यादाश्त कुछ खोने लगी है,
मेरी भरी जवानी भी अब बूढ़ी होने लगी है.
बीवी से तो अब  रिश्ता तोड़ ही नही सकता,
मगर माँ को पेंशन मिलती उसे छोड़ नही सकता.
क्योकि महंगाई की वजह से वेतन कम पड़ने लगा है,
बच्चो की पढ़ाई का खर्च भी अब बढ़ने लगा है.
अब हालात ऐसे हो चले लगता है जोगी हो जाऊगा,
किसी माडर्न बाबा का चेला बन जयकारे लगाऊगा.
आजकल  बाबाओ के चेले पहलवान नजर आते है.
 क्योकि बाबे एव चेले मुफ्त का खूब माल उड़ाते है.
वैसे मैं ऐसी योजना तो बनाता हूँ,
मगर बच्चों के बारे सोच सहम जाता हूँ.
अब ये तय  दो पाटो के बीच पिसना ही पड़ेगा,
बच्चों के खातिर चंदन की तरह घिसना ही पड़ेगा."रैना"

मेरे द्वारा 5 मई 1980 को रात्रि लगभग 11 बजे लिखी गई अपनी पहली रचना.
बिछुड़ा करवा से मत घबराना,
ठहर न मुसाफिर तुझे दूर जाना.
ठहर न मुसाफिर .....................
गम तो है ख़ुशी का एक सहारा,
बिन गम ख़ुशी का नही नजारा,
ख़ुशी से गम को गले से लगाना.
ठहर न मुसाफिर .....................
"रैना" इक दिन तो बहार आएगी,
बिगड़ी हुई तक़दीर सवंर जाएगी,
मिले मंजिल कदम पीछे न हटाना.
ठहर न मुसाफिर ....................."रैना"

  

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

apni takt ka

अपनी ताकत का एहसास तो करवाना पड़ेगा,
बेशक कुछ पाने के लिए कुछ तो गवाना पड़ेगा.
इतनी आसानी से तो फतेह होता नही है किला,
खैर बुलंद इराधे खून  पसीना तो बहाना पड़ेगा.
परेशान दुखी भारत माता कह रही है सपूतों से,
भ्रष्टाचारियों  गद्दारों से तो देश को बचना पड़ेगा.
जनता ने जो दे दिया अपनी एकता का सबूत,
फिर सरकार को जनलोक पाल बनाना पड़ेगा.
निसंदेह जो कर रहा हो निस्वार्थ जनता की सेवा,
"रैना"उसके कदम से कदम तो मिलाना पड़ेगा."रैना"
जब से दुनिया किताबी पढ़ाई पढ़ने लगी है,
तब से प्यार की परिभाषा ही बदलने लगी है.
परवाने भी अब जलने के लिए नही मचलते,
अल्तफ़ शमा भी बिजली से ही जलने लगी है.
माँ बाप बहन भाई बेटे नाते नाती रिश्तेदार,
सबकी नीयत अब वक्त के साथ चलने लगी है.
बेशक अब लड़के चल पड़े कुछ अलग राह पे,
मगर लड़की माँ बाप के अरमां पूरे करने लगी है.
आम जन के घर का बिगड़ गया है बजट देखो,
सरकार की देख रेख में ही महंगाई बढ़ने लगी है.
काम में मसरूफ"रैना" को पल भर फुरसत नही
इसलिए तो बीवी हररोज बिन बात लड़ने लगी है."रैना"  

ndi ke kinare

नदी के किनारे कभी मिलते नही,
कभी पत्थर भी तो पिघलते नही,
कही बात से मुकरने लगे है लोग,
बचे कुछ जो बात से फिरते नही."रैना".

जब से दुनिया किताबी पढ़ाई पढ़ने लगी है,
तब से प्यार की परिभाषा ही बदलने लगी है.
परवाने भी अब जलने के लिए नही मचलते,
अलबत्ता शमा भी बिजली से जलने लगी है.
बहन भाई बेटे के थे पहले भी बदले मिजाज,
अब माँ की ममता भी वक्त के संग चलने लगी है.

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

tu bewfa ho ke

तू बेवफा तेरी याद बावफा निकली,
ये तेरी हो के भी तुझ से जुदा निकली.
तुझको बददुआ देने की हिम्मत न हुई,
तेरे लिये दिल से अक्सर दुआ निकली."रैना"



अब तो समाचार फर्जी भी बनाया जाता है,
ये सही पैसे देकर झूठ सच लिखवाया जाता है."रैना"
भला नेता
जनलोकपाल बिल क्यों करे पास,
क्योकि उन्हें इतना तो है विस्वास,
जब जनलोकपाल बिल बन आयेगा,
पहले फंदा उनके गले में डाला जायेगा.
अन्ना जी
इसलिए ऐसा जनलोक पाल बिल बना लो,
नेताओं को पूरी तरह से बाहर निकालो.
फिर तो देरी का सवाल ही न रह जाये गा,
गैर नेता
जनलोक पाल बिल एक घंटे में पास हो जायेगा.
फिर नेता पहले की तरह गुल्छरे उडायेगे,
पट्रोल पीने वाले खूब पीयेगे,
चारा खाने वाले चारा खायेगे.
देश को घोटाला चैम्पियन बनायेगे........."रैना"

अरे भाई ये व्यंग्य बाण हमारे पूजनीय अन्ना जी के लिए नही नेताओ के लिए है."रैना"
वैसे अख़बार मालिक
अधिकतर पत्रकारों से बिना पैसे काम लेते है,
बदले में उन्हें विज्ञापन इकठ्ठा करने का ठेका देते है,
जनता को खबरे लगा कर डराओ धमकाओ,
ढेर सारे विज्ञापन इकठ्ठा कर लाओ.
जनता का अब एक ही निशाना है,
शसक्त जनलोक पाल बिल पास करवाना है,
यदि ऐसा न हुआ तो कदम पीछे नही हटाना है,
नेताओ को अपनी एकता एहसास करवाना है.
क्योकि हमने भारत को विश्व का सरताज बनाना है."रैना"
जनता का दिल,
शसक्त जनलोक पाल बिल,
नेता गये हिल,ढूंढ़ रहे है बिल,
सोचते अब तो बच न पायेगे,
मलाई मिलेगी नही सूखी कैसे खायेगे."रैना"


जनता का अब एक ही निशाना है,
शसक्त जनलोक पाल बिल पास करवाना है,
यदि ऐसा न हुआ तो कदम पीछे नही हटाना है,
नेताओ को अपनी एकता एहसास करवाना है.
क्योकि हमने भारत को विश्व का सरताज बनाना है."रैना"
जनता का दिल,
शसक्त जनलोक पाल बिल,
नेता गये हिल,ढूंढ़ रहे है बिल,
सोचते अब तो बच न पायेगे,
मलाई मिलेगी नही सूखी कैसे खायेगे."रैना"
  दींन

अब तो समाचार फर्जी भी बनाया जाता है,
ये सही पैसे देकर झूठ सच लिखवाया जाता है."रैना"
भला नेता
जनलोकपाल बिल क्यों करे पास,
क्योकि उन्हें इतना तो है विस्वास,
जब जनलोकपाल बिल बन आयेगा,
पहले फंदा उनके गले में डाला जायेगा.
अन्ना जी
इसलिए ऐसा जनलोक पाल बिल बना लो,
नेताओं को पूरी तरह से बाहर निकालो.
फिर तो देरी का सवाल ही न रह जाये गा,
गैर नेता
जनलोक पाल बिल एक घंटे में पास हो जायेगा.
फिर नेता पहले की तरह गुल्छरे उडायेगे,
पट्रोल पीने वाले खूब पीयेगे,
चारा खाने वाले चारा खायेगे.
देश को घोटाला चैम्पियन बनायेगे........."रैना"

अरे भाई ये व्यंग्य बाण हमारे पूजनीय अन्ना जी के लिए नही नेताओ के लिए है."रैना"
वैसे अख़बार मालिक
अधिकतर पत्रकारों से बिना पैसे काम लेते है,
बदले में उन्हें विज्ञापन इकठ्ठा करने का ठेका देते है,
जनता को खबरे लगा कर डराओ धमकाओ,
ढेर सारे विज्ञापन इकठ्ठा कर लाओ.
हर बात का नही गिला करते,
मानिन्दे गैर नही मिला करते.
जिंदगी दो दिन की बची बाकी,
हर पल फूल से है खिला करते."रैना"
शहरे दिल इस कदर बरबाद हुआ,


ऐसा उजड़ा है फिर न आबाद हुआ.


हर दर्द की दवा तबीबो कर लेता,


इलाज दर्द ए इश्क न इजाद हुआ.


उसको रहे न दिन दुनिया की खबर,


सबक इश्क का जिसको याद हुआ.


"अनन्या" इंसान तब नही समझता,


एहसासे गलती कुछ दिन बाद हुआ.
                                             "अनन्या"




                                                               




कि गया कुछ भी नहीं , रहा कुछ भी नहीं 

अच्छा ही हुआ जो उसने नजरे फेर लीं ,

पर अफसोस तो यह है कि इतनी देर की l 

"वो"बेवफाई करके भी खुश न हुए ,

हम वफा करके बहुत अच्छे निकले ल


तू बेवफा तेरी याद बावफा निकली,


मेरे दिल से तेरे लिए दुआ  निकली.







रविवार, 4 दिसंबर 2011

जीने की बात कह कर मेरे दिल में न आग लगाओ यारों,
बेहतर होगा मुझे तो कोई मरने का रास्ता बताओ यारों. "रैना"

तन्हा न रोता मजे से गुजारा कर लेता,
काश तू  दिल से भी किनारा कर लेता.
इक उम्मीद ने है मुझको  जिन्दा रखा,
वरना कब से मौत का नजारा कर लेता.
इश्क में हासिल होती अक्सर रुसवाई,
ऐसा न होता तो प्यार दोबारा कर लेता."रैना"

mai aap ke prti

मैं आप के प्रति वफादार हूँ,
मगर ध्यान रहे?????????
कुत्ता नही मैं इन्सान हूँऊऊऊऊऊऊऊऊऊउ,
कभी भी अपना विचार बदल सकता हूँ. "रैना"

kam ham itana kar jayge

काम बस इतना कर जायेगे,
नाम तेरा ले कर मर जायेगे.
जान हथेली पे रख ली हमने,
ये मत सोच हम डर जायेगे.
दिल पे लगे है जख्म जो भी,
वक्त के मरहम से भर जायेगे.
"रैना" फौलादी जिगर अपना,
हंस के सितम तेरा जर जायेगे."रैना" 

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

gantatrta diwas

गणतंत्रता दिवस पे सम्मानित होने की इस बार अपनी बारी है,
क्योकि ऊँगली कटवा कर शहीद होने की हमने कर ली तैयारी है.
ये पहली बार नही जब इक कायर को मिलेगा बहादुरी का इनाम,
गाँधी के देश में गधे पंजीरी खाते ऐसी ही कुछ व्यवस्था हमारी है.
जनता के रक्षक भ्रष्ट राजनेता देश को लुट कर भरे विदेशी बैंक,
आश्वासनों से पेट भरती जनता के हिस्से में सिर्फ बेचारी लाचारी है.
"रैना" चोर उच्चको के घर में उजाला उनके शाही नवाबी अन्दाज,
भूख से पेट उनके सिकुड़ रहे जिनके खून में ईमानदारी खुद्दारी है."रैना"
ये क्यों भूल रहे हो इस देश में तुम भी आबाद हो,
फिर ये क्यों नही सोचते तुम्ही भगत,आजाद हो. "रैना"

wah kya jmana

वाह क्या जमाना आ गया है,
चिराग अँधेरे से उजाला मांग रहा है,
साहूकार चोर से ही ताला मांग रहा है.
इक्कसवी सदी का असर है कुछ ऐसा,
मर्द औरत से कान का बाला मांग रहा है.
दिन में तो दिख्नाने को करते  पाठ पूजा,
रात होते भक्त कवाब, प्याला मांग रहा है.
नैतिकता का इस कदर होने लगा पतन,
पेट भरा अब भूखे से निवाला मांग रहा है.
अपने घर "रैना" तो मनाता रोज दीवाली,
मगर पडौसियों के लिए दीवाला मांग रहा है. "रैना"

sukhe pani sekase

पाउडर क्रीम लगा के ही मुहु चमकाते है,
वैसे भी लोग सर्दी में सूखे पानी से नहाते है."रैना"

पहले लड़के दूध घी खाते थे,
कसरत करते हट्टे कट्टे पहलवान नजर आते थे,
मगर अब बेल पूरी, गोल गप्पे खाते है,
 नशा अपनाते है,
इलू इलू गाते है,
तभी कांगड़ी पहलवान नजर आते है."रैना"

कैसे कह दू ये दिल उदास है,
मेरा दिल तो आप के पास है.
कोई अपना न इस शहर में,
इक तू लख्ते जिगर खास है.
जिसने थामा दामन उसका,
फेल नही वो पास ही पास है,
तेरे दीद की तलब है हरदम,
"रैना"का दिल रहता उदास है.





गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

ye mat puchho dukhi hai

 ये मत पूछो दुखी हम कितने,
मुझको मिले बेदर्द गम कितने.
दिल जख्मों से छलनी हो गया,
कैसे दिखाऊ  नैना नम कितने."रैना"

चिराग नही मैं फिर भी जल रहा हूँ,
निकला न सूरज फिर भी ढल रहा हूँ,
इश्क में हासिल हुई है बेरुखी रुसवाई,
पछताऊ बैठा बेबस हाथ मल रहा हूँ."रैना"


खिलते है फूल जैसे मौसम ए बहार में.
दिल की कली खिलती वैसे ही प्यार में.
तेरे दिल में क्या है तू ही जाने हमनवा,
हमने तो खुदा है देखा यार दिलदार में.
पूछ न हाले दिल हम पे बुरी है गुजरी,
मारे गये गुलफाम देखो जी एतबार में.
बातें हुई मगर कोई सिरा तो न मिला,
उलझे रहे तमाम रात यूँ ही तकरार में.
"रैना"ख़ुशी किसी की न गम का सवाल,
गुजर जाये जिन्दगी यूँ  ही जीत हार में."रैना"

हुस्न वाले वफा नही करते,
    दर्द देते दवा नही करते."रैना"
हमे कब फुरसत है ऐ दोस्त हम तो हरपल सफ़र में रहते है."रैना"
उन्होंने इस कदर रुखसत किया अपने शहर से,
हम ढूंढ़ते रहे अपने पैरों के निशान."रैना"
मुझे रास्ता बताने वाला कोई न मिला मैं पत्थरों से पूछता रहा उनके घर का पता."रैना"
ये ख्वाबो के महल बनाना छोड़ दे,
बातों की रेत से बस्ती बसाना छोड़ दे,
यदि गद्दारों का ही देना है साथ,
फिर ये गडयाली आंसू बहाना छोड़ दे."रैना"

dil ki kli hai khilti


खिलते है फूल जैसे मौसम ए बहार में.
दिल की कली खिलती वैसे ही प्यार में.
तेरे दिल में क्या है तू ही जाने हमनवा,
हमने तो खुदा है देखा यार दिलदार में.
पूछ न हाले दिल हम पे बुरी है गुजरी,
मारे गये गुलफाम देखो जी एतबार में.
बातें हुई मगर कोई सिरा तो न मिला,
उलझे रहे तमाम रात यूँ ही तकरार में.
"रैना"ख़ुशी किसी की न गम का सबब,
गुजर जाये जिन्दगी यूँ  ही जीत हार में."रैना"