बुधवार, 22 मई 2013


दोस्तों मेरी रचना का ये रंग जिसने
 मुझे रोने के लिए मजबूर कर दिया,

पूछे बिना तन्हा चले जाते हैं,
जाने वाले बहुत तड़फाते हैं।
यादें खोखला कर देती सीना,
ऐसा जाते लौट के न आते हैं।
ऐसे रुठ जाते जिगर के टुकड़े,
फिर कभी शक्ल न दिखाते है।
साथ छोड़ कर दूर जाने वाले,
मौका बे मौका खूब रूलाते हैं।
तू इतना तो बता दे मेरे मौला,
ये जाने वाले कहां घर बनाते है।
"रैना" को बीच छोड़ जाने वाले,
चल हम भी तेरे पीछे आते हैं।"रैना"

2 टिप्‍पणियां:

  1. मंगलवार 28/05/2013 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं ....
    आपके सुझावों का स्वागत है ....
    धन्यवाद !!

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  2. जो किसी से न कह सके वह दर्द जब बाहर निकलता है तो आंसू बता देते हैं की कितना दर्द होता है जब अपना कोई दिल से दूर चला जाता है ....
    बहुत बढ़िया दिल से निकली एक आह सी ..

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