सूफी गीत
तन्हा न कहो मुझको,
मेरे पास न तन्हाई है,
मैं भला फिर तन्हा कैसे,
संग सांवरे प्रीत लगाई है।
मोरे सांवरे से मिल गये नैन,
पल भर भी न आये मोहे चैन,
मैं दीवानी मैं दीवानी मैं दीवानी हो गई,
मैं को मैं भूल बैठी,खुद से बेगानी हो गई,
मैं दीवानी .........................
होठों पर सजना पी का नाम है,
हर तरफ मेरा श्याम ही श्याम है,
दिन भी वो मेरी रात भी वो,
दीन धर्म मेरी जात भी वो,
उसके बिना मैं हूं अधूरी,
पी से मिलन हो हो जाऊ पूरी,
सुन ले विनती अर्ज तू मेरी,
श्यामा और न कर अब देरी,
बरबाद ये मेरी जवानी हो गई।
मैं दीवानी मैं दीवानी ............"रैना"
सुप्रभात जी ............जय जय मां