शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

mujh me tu tujh me

 पास रहते हो मगर दिखते नही हो,
गम यही अफ़सोस है मिलते नही हो।"रैना"

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

 काले बादल उड़ते जाये,
पानी अब तो कम बरसाये,
कैसे हो फूलों का खिलना,
सोचे माली अति घबराये
पानी तो है जीवन रेखा,
बादल को कैसे समझाये।
बादल बोला दुःख का मारा,
हम पानी कैसे बरसाये।
गन्दा अब तो पानी सारा,
सूरज की जां निकली जाये।"रैना"


aao fursat hai

पिंजरा मिट्टी का देखो इक दिन टूट जाये गा,
पिंजरे में कैद पंछी तो तब बेशक छूट जाये गा।

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

jo mil jaye nyamat smjhe

जो मिल जाये नयामत समझे,
जो न मिले गिला न कोई शिकवा,
ये फितरत होती फकीरों की,
मेहनत पे विश्वास करे,
पर कदर करते तकदीरों की।
ये फितरत होती ..............
ख़ुशी में ज्यादा खुश नही,
गम में ज्यादा रोते नही,
हर मुश्किल को सह लेते
विचलित कभी होते नही,
चिन्ता में डूबे नही रहते,
सोच रखते है तदबीरों की।
ये फितरत होती ............
हर काम करते खूबी से,
पर उसकी रजा में रहते है,
किसी का बुरा नही करते,
जज्बातों में अक्सर बहते है,
मस्त मोला खुले दिल वाले,
चाह रखते नही जागीरों की।
ये फितरत होती ..............."रैना"
सुप्रभात जी ........good morning ji 




apni masti me

अपनी मस्ती में रहते है,
आशिक तो पीड़ा सहते है।
हम तुमसे जब से है बिछुड़े,
आंखों से दरिया बहते हैं।
अब सच कहने वालों पे तो,
गम के  पर्वत ही ढहते है।
जो उसको है अच्छा लगता,
आओ कुछ ऐसा करते हैं।
"रैना" पागल हो जाये गा,
कहने वाले तो कहते हैं। ......"रैना"

apne ghar to

दोस्तों फिर लिख दी ग़ज़ल
क्या आप पसंद करेगे जी।

अपने घर तो गम रहते हैं,
पर मस्ती में हम रहते हैं।
हंसना मेरी फितरत यारो,
प्यासें नैना नम रहते हैं।
बीवी अक्सर झगड़ा करती,
अब हम घर में कम रहते हैं।
खाने पीने की बस सोचे,
चिन्ता में हरदम रहते हैं।
तुम तो मेरे दिल में बसते,
क्या उस दिल में हम रहते है।
रैना"को तो गहरा सदमा,
बिन तेरे बेदम रहते हैं। ..."रैना"

बुधवार, 14 नवंबर 2012

ham to ham hai likin

दोस्तों पेश है इक मेरे दिल की रचना

तू देता गम मुझको,तेरे गम कम निकले,
हां तुम तो तुम निकले,पर हम तो हम निकले।
शिकवा करते करते,बेशक हिम्मत हारे,

सोचे तन्हा बैठे,फुरसत है दम निकले।
जाने कब ये माने,करता हेराफेरी,
दिल तो बहला मेरा,पर नैना नम निकले।
मुश्किल भी घबराई,देखे मेरी हालत,
तू ही कुछ कर मौला,जुल्फों का खम निकले।
हंस के पीड़ा सहना,मस्ती में ही रहना,
"रैना" उसका सेवक,मुख से बम बम निकले। "रैना"

maa to kya kis

मां को समर्पित इक गीत

मां तू क्या किस मिट्टी की बनी,
त्याग की देवी ममता की धनी,
बच्चे को जन्म दे जां दाव पे लगाती है,
बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
 मां ........ मां  ............. मां ...........
लाड प्यार से मां बच्चे को पालती,
अपने से ज्यादा बच्चे को सम्भालती।
बच्चा खुश मां की रूह खिलखिलाती है।

बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
मां ........ मां  ............. मां ...........
बड़े ही चाव से मां खाना पकाती है,
पहले बच्चों को पेट भर खिलाती है,
बचा खुचा खा के भी मुस्कराती है।

बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
 मां ........ मां  ............. मां .........
बच्चों पे सब कुछ कर देती अर्पण,
धन्य है मेरी माता रानी का समर्पण,
दुःख दे बच्चा फिर भी सीने से लगाती है।

बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
मां ........ मां  ............. मां ...........

मिली खुशियाँ न रही कोई उलझन,
"रैना" करता है मां में  रब के दर्शन,
मां ही जीवन का रास्ता दिखाती है। ......."रैना"


bal diwas

बाल दिवस पर विशेष कविता

बाल दिवस क्या होता है,
पूछता है इक बाल श्रमिक,
अपने बाल श्रमिक दोस्त से,
सुना है??????
इस दिन बच्चे करते खूब धमाल,
बच्चों को किया जाता माला माल।
नेता दावें करते?????
बच्चों की जाएगी देखभाल।
हर बच्चा पढ़े लिखेगा,
सब की होगी सम्भाल।
आगे से दूसरा बाल श्रमिक बोला,
हमारा तो किसी को नही ख्याल,
मालिक हमें करते हैं हलाल,
बंद रहते फैक्टरी में सारा साल।
आगे से उसने बोला??????
भाई तुम करते हो कमाल,
यहाँ अधिकतर समाज सेवी,
कर्मचारी,अधिकारी????
नेताओं के दलाल।
जो पी जाते हमारा सारा माल,
सिर्फ कागजों में बजती खड़ताल।
वो बच्चों के नाम पे खाते मुर्ग मसल्म,
बच्चों को नसीब नही होती रोटी दाल।
बेशक बाल श्रमिक का सही है सवाल,
बाल दिवस मनाते हर साल,
पर गरीब बच्चों का फिर भी वही हाल।
ऐ मेरे देश के ठेकेदारों?????
बाल दिवस को सार्थक बनाओ,
हर बच्चें को उसका हक़ दिलाओ।
ये बच्चे ही देश का भविष्य हैं।
भारत माता की जय। ।।।।।।।।।।। "रैना"


मंगलवार, 13 नवंबर 2012

din mira to n kala

खूब दीप जलाये दीवाली की रात,
हर तरफ हुई रोशनी की बरसात,
ये अफ़सोस फिर भी न बनी बात,
अन्धेरा कायम है दिल के घर में। "रैना"

सोमवार, 12 नवंबर 2012

aa diwali ke din


दीवाली के दिन मिल जाये,
दीवाली को बिछुड़े मिलते,
मुकर्र होता सब उसके घर,
बेमौसम कब ये गुल खिलते। "रैना"

ugte surj si

हैप्पी दीवाली

दिल महके खुशहाली करदे,
उगते सूरज सी लाली करदे,
इतनी विनती मेरे मौला,
हर घर को दीवाली करदे।
दोजख सा मुफलिस का जीवन,
दूर कहीं तंगहाली करदे।
मात पिता सुख चैन से जी ले,
खुश लाला ओ लाली करदे।
फिर तो सारा मसला हल है,
गुल पे किरपा माली करदे।
दीवाली पे सोचे अपनी,
मन उसका है खाली करदे।
"रैना"छोड़ो पटाखे मत फोड़ो,
 दीवाली कुछ निराली करदे।
सुप्रभात जी, दीवाली की
शुभकामनाओ सहित। राजिंदर शर्मा "रैना"

ao kuchhaese

दोस्तों से गुजारिश

आओ कुछ ऐसे दीवाली मनाये,
अपने मन में हम दीप जलाये,
ये बाहरी सारे अडम्बर छोड़े,
भीतर का अन्ध्कार मिटाये।
आओ कुछ ऐसे ..............
जानती है ये दुनिया सारी,
मिठाई तो अब है बीमारी,
छलिया कपटी दुष्ट व्यापारी,
करते अब वो मिलावट भारी,
मिठाई को तो हाथ न लगाये।
आओ कुछ ऐसे .................
पटाखें तो प्रदूषण फैलाते,
जीवों के लिए मुश्किल लाते,
जानकार तो ये भी बतलाते,
प्रदूषण से जीव भी मिट जाते,
हिफाजत को पटाखे न चलाये।
आओ कुछ ऐसे .................
दीवाली के दिन बस दिल मिले,
हर चेहरा फूल के जैसा खिले,
भूल जाये हम सारे शिकवे गिले,
जुबां खैर मांगें दुआ के लिए हिले,
मिलझुल गीत ख़ुशी के गाये।
आओ कुछ ऐसे ................."रैना"


diwali ki

दोस्तों के नाम इक ग़ज़ल

दीवाली की बातें चलती,
मेरे दिल में होली जलती।
मैं बिरहन की मारी दुखिया,
बैठी अब हाथों को मलती।
साजन से जो दुरी पनपी,
इसमें मेरी सारी गलती।
किस्मत ही जब धोखा देती,
फिर तो बिगड़ी बात न बनती।

दिल की धड़कन है बढ़ जाती,
आँखों से जब आँखें मिलती।
"रैना"दिन तो हो जाना है,
हिम्मत से मुश्किल भी कटती। "रैना"

रविवार, 11 नवंबर 2012

soch le jra kyo

सोच ले जरा क्यों मिली जिन्दगी,
तभी मिली जिन्दगी तू कर बन्दगी,
बन्दगी से तेरा होगा कल्याण,
सफर ऐ जिन्दगी होगा आसान।
 होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

बन्दगी क्या है इस का भी ध्यान कर,
हर जीव का मन से मान सम्मान कर,
हर शै में तू इक रब को ही जान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

उलझा रहता है न तुझको ख्याल है,
सोच ले लाख चौरासी का सवाल है,
अपना भी कुछ तू कर ले घ्यान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

खत्म न होता कोई भी काम पूरा रे,
एक होता पूरा दूजा रहता अधूरा रे,
हर पल मनवा रहता परेशान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

"रैना" तू रंग जा नाम के रंग में,
कर बदलाव अपने जीने के ढंग में,
छोड़ दे मोह माया अभिमान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......
सुप्रभात जी good morning ji

wada krke nibhaya nhi hai

दोस्तों दुखी मन से,
ये गीत लिख रहा हूँ,
देश की हालत पर।

ओ मेरे देश की धरती,
डाकू चोर उच्चके कपटी,
अब ऐसे नेता पैदा करती

ओ मेरे देश ..............
यहाँ राजनीती का मौसम है,
सब अपनी ढपली बजाते है,
जो पिटते जेल में बंद होते,
देखो वो ही नेता बन जाते,
देख के इन की हालत को,
भारत मां है आहें भरती।
ओ मेरे देश ...............
फिर खद्दरधारी नेता ये,
ऐसे देश की सेवा करते है,
लुट के पैसा गरीबों का,
जा स्विस बैंक में भरते है,
कोई नही इन्हें रोकने वाला,
सरकार रक्षा उनकी करती।
ओ मेरे देश ...................
सारा सिस्टम फेल यहाँ,
बस रिश्वत काम चलाती है,
परिवारवाद का बोलबाला है,
इक घर के सारे बाराती है।
अनाज  सड़े गोदामों में,
बेचारी जनता भूखी मरती।
ओ मेरे देश .................."रैना"


दोस्तों इक ग़ज़ल आप के नाम 

याद तेरी बावफा निकली,
तू भला क्यों बेवफा निकली।
खेल किस्मत का इसे कहते,
जान मेरी ही कजा निकली।
हम खता करते नही संभव,
ये उसी की तो रजा निकली।
तोहमत किस पे लगा देते,
बात अपनी की हवा निकली।
सोचते है जब कभी तन्हा,
तू वफा थी क्यों जफा निकली।
हैं उठे जब हाथ सजिदे को,
आज मुख से बददुआ निकली।
जिन्दगी भर बन्दगी तेरी,
दर्द की ये इक दवा निकली।"रैना"

शनिवार, 10 नवंबर 2012

aai diwali

आई दीवाली????
लोग घरों को सजाने लगे,
गंदगी को हटाने लगे।
चार दिन पहले ही,
बेहिसाब दीप जलाने लगे,
ख़ुशी में पटाखें बजाने लगे,
मगर अफ़सोस???
ये दीप पटाखें????
अंधकार न मिटायेगे,
बेहिसाब प्रदूषण ही फैलायेगे।
पटाखें बजाना कोन सा नखरा है,
प्रदूषण जीवन के लिए खतरा है।
इसलिए?????
कुछ ऐसी दीवाली मनाई जाये,
मन के घर से गंदगी हटाई जाये,
पटाखें रहित दीवाली मना कर,
घरती मां की हरियाली बचाई जाये।"रैना"
सुप्रभात जी ..................good morning ji
happy diwali ji...........

aaj fir yaad

दोस्तों जाते जाते इक ग़ज़ल

याद तेरी बावफा निकली,
तू भला क्यों बेवफा निकली।
खेल किस्मत का इसे कहते,
जान मेरी ही कजा निकली।
हम खता करते नही संभव,
ये उसी की तो रजा निकली।
तोहमत किस पे लगा देते,
बात अपनी की हवा निकली।
सोचते है जब कभी तन्हा,
तू अदा थी क्यों खता निकली।
हैं उठे जब हाथ सजिदे को,
आज मुख से बददुआ निकली।
जिन्दगी भर बन्दगी तेरी,
गम नही तू नाखुदा निकली।"रैना"



muddt se jla rhe hai

मुद्दत से मना रहे???
दीवाली,
जला रहे हैं दीप,
अंधेरा मिटाने को,
घर जगमगाने को,
अफ़सोस ???????
हुआ न सवेरा है,
दीपक तले??????
फिर भी अंधेरा है। "रैना"

ab morcha to

अब मोर्चा संभालना ही पड़ेगा,
देश को बचाने के लिए,
रास्ता निकालना ही पड़ेगा।
वरना ये देश के ठेकेदार,
कुछ अनर्थ कर देगे,
देश को स्विस बैंक में,
गिरवी ही धर देगे।
इनका न कोई दीन ईमान है,
सफेद कपड़ो में छिपा शैतान है।
देखिये भ्रष्टाचारी अधर्म हो गये है,
गैरत बेच खाई बेशर्म हो गये है।
हंसते हंसते जेल जाते हैं,
तीर्थ कर के आये ऐसे,
हंसते हंसते जेल से बाहर आते है।
बेशक अन्ना रामदेव केजरीवाल ने,
जनता को जागृत तो किया है,
गद्दार नेताओ को जख्म तो दिया है।
ये जख्म नासूर बनाना हो,
हर भारतीय को आगे आना होगा।
जगो उठो देर न लगाओ,
इसमें हम सब की भलाई है,
मेरी भारत मां ने सबको आवाज लगाई है।
भारत माता की जय ............"रैना"
दोस्तों आप के लिए खास रचना 

फिर भला क्यों गिला होगा,
खत्म जब सिलसिला होगा।
याद उसकी सताती है,
है जहां दिल मिला होगा।
 इश्क करना बड़ा मुश्किल,
जो करे वो फना होगा।
बागवा देख कर खिलता,
फूल जब भी खिला होगा।
फकत उसको मिले मंजिल,
दूर तक जो चला होगा।
बात ये तो पुरानी है
कर भला तो भला होगा।
दाग मिटता नही "रैना"
इश्क में जो लगा होगा। "रैना"

fir bla kya gila

फिर भला क्या गिला होगा,
खत्म जब सिलसिला होगा।
याद उसकी सताती है,
है जहां दिल मिला होगा।
इश्क करना बड़ा मुश्किल,
जो करे वो फना होगा।
बागवा देख के खिलता,
फूल जब भी खिला होगा।
फकत उसको मिले मंजिल,
दूर तक जो चला होगा।
दूर देखो उठे धूआं,
घर किसी का जला होगा।

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

o lssi mkki roti

दोस्तों आज फिर बचपन,
 मां का प्यार,गाँव याद आ गया
एक गीत पेश कर रहा हूँ।

ओ लस्सी मक्की की रोटी साग,
मां री बहुत याद आये,
तेरे प्यार वाला मिठ्ठा वो राग,
मां री बहुत याद आये।
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये बचपन दिन वो बहार के,
आंखों आगे घूमते पल वो प्यार के,
लगा दिल पे यादों वाला दाग,

मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये कुएं का डंडा मिठ्ठा पानी,
गांव की मिट्टी ने मुझे बख्शी जवानी,

वो तालाब के किनारे वाला बाग़,
मां री बहुत याद आये।

मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी ....."रैना"


गुरुवार, 8 नवंबर 2012

mila hira jnm

सुप्रभात सूफी गीत के साथ,

मिला हीरा जन्म तुझको,
ये उसकी मेहरबानी है,
अब कुछ तो फ़िक्र करले,
चार दिन की कहानी है।
मिला हीरा जन्म तुझको .....
पहले कर्म किये अच्छे,
मानुष जन्म जो पाया है,
सारे चक्कर मिटाने को,
तुझको उसने बनाया है,
मोह माया में तू उलझा,
करता आना कानी है।
मिला हीरा जन्म तुझको .."रैना"
good morning ji  

kash mera koi apna ho

दोस्तों आप की सहमती पर लिखी ग़ज़ल

जीवन भर ऐसे ही रोना,
मिलना बिछुड़न ये सब होना।
सारे जख्मों ने भर जाना,
खाली रहता दिल का कोना।
होनी अक्सर हो के रहती,
चलता रहता पाना खोना।
इसकी कैसी चिन्ता करनी,
मरना जलना ये सब होना,
उसका जीवन बेमकसद का,
जिसने लम्बी ताने सोना।
"रैना' उसकी भी सुन ले तू,
वरना तुझको गम है ढोना। "रैना"


aaj ka kaiku

आज
के  kaiku

नेता????
सिर्फ लेता ????
पहले वोट,
फिर नोट।
देता????
झूठे आश्वसन।

दौड़ी ??????
महंगाई की
 रेल,
जनता का हार्ट
फेल,
 सरकार मस्त।

सफेदपोश????
करोडपति भिखारी,
भीख मांगने की????
करने लगे तैयारी
चुनावी मौसम की,
सम्भावना।  "रैना" 

बुधवार, 7 नवंबर 2012

kaiku

धीरज चौहान जी का kaiku पढ़ कर
मेरे मन में kaiku लिखने का विचार आया
पेश है kaiku अपने विचारो से अवगत करवाए।

गडकरी???
खूब लगाओ ???
फटकरी,
जख्म भरने वाला नही hahahaha.

वडेरा ????
कुछ न बिगड़े तेरा,
तू दामाद hahahaha 

केजरीवाल,
आका
अब कब होगा
धमाका।
              "रैना"

dilli kab sone wali hai

ग़ज़ल का नया रुप दोस्तों
तवाजो चाहुगा जी

अब दिल्ली कम ही सोती है,
हर दिन इक रैली होती है।
नेताओं के झूठे भाषण,
भारत मां सुन के रोती है।
महंगाई बन नागिन डसती,
मिलती मुश्किल से रोटी है।
गाली दो या अन्डे मारो,
नेता की चमड़ी मोटी है।
उसके घर में सुख कम रहता,
जिसकी  नीयत ही खोटी है।
बीवी होती घर की लक्ष्मी,
वो पतली चाहे मोटी है।
"रैना" अपनी चिन्ता कर लें,
जीवन तो हीरा मोती है।  "रैना"

mere dost achchhe

रचना पेशे खिदमत है जनाब

सारे वादें सच्चे निकले,
मेरे दोस्त अच्छे निकले।
शिकवा उनसे कैसे करते,
किस्मत में ही धक्के निकले।
बेशक उनको मिलती मन्जिल,
जो वादे के पक्के निकले।
बातों की ही कीमत लगती,
बिकते कम जो कच्चे निकले।
दोपहरी में डाका डाला,
शातिर डाकू बच्चे निकले।
देखो बदली सारी बस्ती,
"रैना"हक्के बक्के निकले।  "रैना"

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

dosto se ik vinti arj ardas

एक अर्ज, विनती,अरदास
दोस्तों कुछ समय पहले तक मैं गुमनाम शायर,कवि था,
मगर फेस बुक ने  हमे मशहूर कर दिया है,
 अब मैं कवि सम्मेलनों में भी जाने लगा हूँ।
मैं उन दोस्तों से अनुरोध करता हूँ,
 जो कवि सम्मेलन इत्यादि आयोजित करवाते है।
वो यदि मेरी लेखनी को बेहतर समझते है तो
मुझे भी इज्जत बख्शे और हमें भी बुलाये ताकि मैं
भगवान की बख्शी हुई नयामत को सब में बाँट सकू।
जो मेरे दोस्त गायक है उनसे भी अनुरोध है की,
अच्छे गीत,गज़ल,भजन सूफी पंजाबी,
हिंदी कलाम के लिए हम से सम्पर्क करे।
मेरा   मोब 09416076914 हैं।

bura daur chl

 दोस्तों गजल का नया अंदाज शायद आप को पसंद आये।

मौसम ने बदली फितरत,खुद को सम्भाले रखना, 
 आंखें तो खोले लेकिन,होठों पे ताले रखना।
चाहे मुश्किल ने घेरा,है मन्जिल से भी दुरी,
तू मन मत छोटा करना,उम्मीदें पाले रखना।
छाया है गुप अन्धेरा,जीवन की राहे काली,
तुझको मिल जाये मन्जिल,मन में उजाले रखना।
है दुनिया जैसा जीना,ये जीना भी क्या जीना,
हो तेरी अपनी मस्ती,अन्दाज निराले रखना।
"रैना" बूरे करमों से, तू कर लें तौबा तौबा,
तू साजन के कदमों में, अब डेरा डाले रखना। "रैना"

सोमवार, 5 नवंबर 2012

rote bchcho ko

मां की शान में चंद अल्फाज

रोता बच्चा बहलाती मां
है भूखी भी सो जाती मां।
मां की ममता मां ही जाने,
बच्चे पे जान लुटाती मां।
अपना सुख बच्चों में बांटे,
देखो खुद पे इतराती मां।
बच्चों के खातिर सब करती,
हर मुश्किल से टकराती मां।
इस युग में मां की बेअदबी,
चुप ही आंसू पी जाती मां।
"रैना"सोचे मां के बारे,
है किस दुनिया से आती मां।
सुप्रभात जी .......good morning ji.

shahar men

दोस्तों इक और ग़ज़ल मेरी किताब
" हर हाथ हवा देगा"से
बुझ जा शमा या तू जला दे मुझे,
कुछ तो वफा का ये सिला दे मुझे।
मैं तो ख़ुशी से जाम पी लू भला,
तू जहर ही चाहे पिला दे मुझे।
तेरी गली भी अब नही याद है,
तू घर तिरे का तो पता दे मुझे।
हसरत यही अब और जीना नही,
कर रहम खुद ही तू मिटा दे मुझे।
कटती न काली रात लम्बी लगे,
तू हम जुबां कोई मिला दे मुझे।
मन्जिल नही मिलती बता क्या करु,
अब रास्ता कोई दिखा दे मुझे।
"रैना" करे विनती मिरे ओ खुदा
अब तू किनारे से लगा दे मुझे। ..."रैना"

mere spne aksr tute hai

सपने अक्सर टूटे हैं,
भाग्य हमसे रुठे है।

रविवार, 4 नवंबर 2012

khuj le use khoj le

मेरे यार के सजिदे में इक सूफी गीत

कोई कहता मस्जिद में बैठा,
कोई कहता बैठा मन्दिर में,
खोजने वालों ने है ये पाया,
वो बैठा है मनमन्दिर में।
खोज ले उसे खोज ले,
अपने अंदर खोज ले,
मौज ले फिर मौज ले,
अपने अंदर खोज ............
ऊपर आसमां नीचे धरती,
धरती नीचे पानी है,
पानी और हवा से ही,
चलती ये जिंदगानी है,
इन सब को बनाने वाली,
वो अदभुत इक शक्ति है,.
उस शक्ति के दम से ही,
सारी दुनिया चलती है।
खोज ले उसे खोज ले,
मौज ले फिर मौज ले,
उसे अपने अंदर ................"रैना"
सुप्रभात जी .....................good morning ji

pi ke didar ko

यार की बन्दगी में सूफी गीत

ये मन तरसे,
नैना बरसे,
उस पहले प्यार को,
पी के दीदार को।
ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............
बेशक तू मुझ से दूर नही,
मुझको पर्दा मन्जूर नही,
आ सामने आ,
आके झलक दिखा,
इश्क के बीमार को।
ये मन तरसे ......
पी के दीदार ..............
तू मेरी मंजिल मक्सूद है,
तेरे दम से मेरा वजूद है,
तू बनाये मिटाये,
मर्जी से चलाये
इस संसार को।

ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............   "रैना"


barbad hote nshe men

दोस्त ये मेरी ग़ज़ल?????????
खास कर युवा वर्ग को समर्पित है

तू छोड़ बूरी लत नशा कर हौसला,

मय खून पीती जिस्म कर दे खोखला।
अब देश में है चल पड़ी ऐसी हवा,
भटका युवा कुछ भी नही है सोचता।
दो चार ही बाकी बचे है ऐब से,
अब हर किसी को देखिये गा झूमता।
है शहर में बिकते नशे हर किस्म के,
कोई किसी को अब नही है रोकता।
जो भी नसीहत दे किसी को सोच कर,
कहते उसे पागल भला है भौंकता।
जो जाम पीता है दवा ही जान कर,
वो अक्ल मंद अक्सर मजे में झूमता।
"रैना" कभी तू सोच ले ये गौर से,
तू मौत के ये खेल क्यों है खेलता। "रैना"

शनिवार, 3 नवंबर 2012

manjil tu hi

इक ग़ज़ल उसके नाम।

मन्जिल तू ही साहिल है,
फिर क्यों भटके ये दिल है।
शिकवा तुझ से क्या करना,
सब कुछ ही तो हासिल है।
तेरे चर्चे महफिल में,
बेशक तू इस काबिल है।
हमने इतना जाना है,
तू जीवन में शामिल है।
अदला बदली कर सकता,
तुझको रूतबा हासिल है।
क्या ढूंढे बेगानों में,
अपना ही अब कातिल है।
"रैना"से कुछ मत कहना,
सच जानो वो पागल है। "रैना"
सुप्रभात जी ............good morning ji

बात तक़दीर की मैं करू कैसे,

दोस्तों अपनी प्यारी ग़ज़ल 
आप की खिदमत में पेश है,
तवाजो चाहू गा। 

अब चली ऐसी हवा देखो, 
यार करते हैं दगा देखो। 
इश्क भी जाहिल हुआ यारों, 
हुस्न की जालिम अदा देखो।
 पूछते हैं फरिश्ते भी अब, 
है कहां मिलती वफा देखो। 
हैं दुखी इन्सान खुद से ही, 
ढूंढता फिरता कजा देखो। 
दर्द अपने ही तुझे देगे,
ये जमाने की अदा देखो।
बन्दगी में जब लगे दिल है,
जिन्दगी में तब मजा देखो।
बाद मुद्दत भी नशे में हैं,
रिन्द होते है फना देखो।
इश्क में हासिल जुदाई है,
मौत ही "रैना"सजा देखो। ....."रैना"

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

ab chli hwa aisi

अब चली ऐसी हवा देखो,
यार करते हैं खता देखो।
इश्क भी जाहिल हुआ यारों,
हुस्न की जालिम अदा देखो।
पूछते हैं फरिश्ते भी अब,
है कहां मिलती वफा देखो।
हैं दुखी इन्सान खुद से ही,
ढूंढता फिरता कजा देखो।
दर्द देगे
जिन्दगी में कुछ मजा देखो।

ik ummin

इक आशा के दम से ही जिन्दा है,
वरना कब के दुनिया छोड़े जाते।"रैना"

har mushkil sah kar

हर मुश्किल सह कर बच्चों का पेट भरे है,
इस दुनिया में इतना तप तो माँ ही करे है,...."रैना"
सुप्रभात जी ....................good morning ji

hta hu diwano men

कुदरत की रहमत तो सब पे बरसे,
यूं बुझदिल ही अक्सर प्यासा तरसे।
"रैना"मन्जिल उसको सजिदा करती,
तपती दोपहरी जो निकले घर से। "रैना"


ab chli

अब चली ऐसी हवा देखो,
 यार देते अब दगा देखो।
ग़ज़ल आप के वास्ते दोस्तों

अब जमाने की अदा यारों,
यार देता है दगा यारों।
तुम वफा की बात मत करना,
है सिला मिलता कजा यारों।
क्यों करे दोस्त वफा कोई,
अब वफा देती सजा यारों।
दर्द देता सोचता कम हैं,
शख्स कब देता दवा यारों।
तुम कभी सोचो अकेले में,
क्यों हुये वादे हवा यारों।
मौत ही अब तो इलाजे गम,
कब सुने गा वो खुदा यारों।
याद उसकी बावफा निकली,
जब मरे तब हो जुदा यारों।
मान"रैना"को मिले मन्जिल,
अब करो पूजा दुआ यारों। ......... "रैना"

गुरुवार, 1 नवंबर 2012

piya ji mai to pe wari

करवा चौथ के दिन अपनी बहनों को समर्पित गीत,

पिया जी मैं तो पे वारी,जाऊ वारी वारी,
तोहे लग जाये मोरी उमरिया सारी।
पिया जी मैं .............................
मैं क्या जानू भगवन कैसे,
मन मंदिर में तुम हो बैठे,
सांसों में धड़कन में तुम हो,
मेरा तो जीवन ही तुम हो,

जन्मों के तप से तुझको पाया,
खिला ये गुलशन है महकाया,
तोहे पाया जिन्दगी सफल हमारी,
पिया जी मैं ..........................."रैना"


ham bhule tera

चाहे रूतबा ऊँचा कद हो,
पर अरमानों की इक हद हो,
खाना पीना मस्ती सोना,
जीवन का कोई मकसद हो। "रैना"
सुप्रभात जी ..............good morning ji

dil se jb dil milta hai

दोस्तों आप के नाम इक ग़ज़ल

दिल से जब ये दिल मिलता है,
गुलशन में गुल तब खिलता है।
आशिक ही ये समझे जाने,
दिल का दिल से क्या रिश्ता है।
सच का व्यापारी गर्दिश में,,
झूठे का सब कुछ बिकता है।
सब ने सूरत फितरत बदली,
जो होता वो कब दिखता है।
"रैना"कुछ तो छोड़े जाता,
ये सूरज जब भी छिपता है। ....."रैना"


dekho ji kiya hai kmal

सरकार का गीत

देखो जी किया है कमाल, मनमोहन सरकार ने,
कोयला खाया गैस चढ़ाई,
अंबानी को किया मालामाल, मनमोहन सरकार ने।
देखो जी किया है .............................
आठ साल की दुःख भरी कहानी,
महंगाई पे आई भरपूर जवानी,
मनमोहन दादा है मौनी बाबा,
देश को कर दिया कंगाल, मनमोहन सरकार ने।
देखो जी किया है ..............................
इमानदारों को करे डिमोशन,
भ्रष्टाचारियों को दे प्रमोशन,
नेताओं की मौज बहारे,
जनता कर दी बेहाल, मनमोहन सरकार ने।
देखो जी किया है ...............................
इस सरकार के काले कारनामे,
हर दिन उजागर नये घोटाले,
घोटाला चैम्पियन देश हमारा,
चैम्पियन बनाये दलाल, मनमोहन सरकार ने। 
देखो जी किया है .........................."रैना"