गुरुवार, 22 अगस्त 2013

दोस्तों के नाम आज की शाम 

तेरी नजरों ने काम कर दिया,
गुमनाम सरेआम कर दिया।
इक बार पिला के फेरी आंखें,
रस अंगूरी मेरे नाम कर दिया।
तेरी इन बावफा यादों ने तो,
मेरा जीना ही हराम कर दिया।
ठोकर खा कर हम सम्भले है,
उनको दूर से सलाम कर दिया।
ये सोच हम तसल्ली कर लेते, 
नाम है चाहे बदनाम कर दिया।
पैसे की इस बढ़ती भूख ने "रैना"
रिश्ते नाते को तमाम कर दिया। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

बुधवार, 21 अगस्त 2013

teri najro ne vo

तेरी नजरों ने काम कर दिया,
गुमनाम सरेआम कर दिया।
इक बार पीला के फेरी आंखें,
रस अंगूरी मेरे नाम कर दिया।
तेरी इन बावफा यादों ने तो,
मेरा जीना ही हराम कर दिया।
ठोकर खा कर हम सम्भले है,
उनको दूर से सलाम कर दिया।
ये सोच कर ही तसल्ली लेते हैं,
नाम है चाहे बदनाम कर दिया।
पैसे की इस बढ़ती भूख ने "रैना"
रिश्ते नाते को तमाम कर दिया। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

yad pida

भारत में ये कैसे दौर आ रहे हैं,
पहले फाइलों को चूहें कुतरते थे,
मगर देश में होती अनहोनी देखो
अब फाइलों को भेड़िये खा रहे हैं। राजेन्द्र रैना गुमनाम

चलो ये भ्रम भी मिटा लेते हैं ,
65 वर्षों से अजमा ही रहे हैं,
कोई फिट नही बैठा????
इस बार मोदी को अजमा लेते हैं।
वरना अधूरा ख्याल रह जाये गा,
मोदी को तो रहना ही है,
जनता को भी मलाल रह जाये गा।
बेशक हमें भावनाओं में नही बहना चाहिए,
इसे या उसे मलाल किसी को न रहना चाहिए।राजेन्द्र रैना गुमनाम 

मंगलवार, 20 अगस्त 2013

plkon ki chhav ne

पलकों की छांव में,सपनों के गांव में,
मजा बेसुमार है,प्यार ही प्यार यहां,
प्यार ही प्यार है प्यार ही प्यार …
दिलदारों की बस्ती मस्ती ही मस्ती है,
हर शै महंगी पर,मोहब्बत तो सस्ती है,
दिल के दरिचें खुले न कोई इन्कार है।
प्यार ही प्यार ………….
तुम आओ इस शहर में आ के तो देखो,
इक बार दिल से दिल मिला के तो देखो,
मिल जाती फिर दिल से दिल की तार है।
प्यार ही प्यार …………….
रैना"जो बची अब तो उसको संवारे गे,
पलकों की छांव में जिन्दगी गुजारे गे,
होगा न धोखा कभी हमें ये तो एतबार है।
प्यार ही प्यार……………राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात के साथ। …जय जय मां 

दोस्तों कमेंट्स करो न करो मगर पढ़ों जरुर

बेशक शहीदों का तो हरगिज न अपमान होना चाहिए,
जो देश पे न्यौछावर हुए उनका सम्मान होना चाहिए।
सेम सेम सेम अब इक ऐसी नई बात आई है प्रकाश में,
अमर शहीदों का नाम ही दर्ज नही रखा है इतिहास में।
मगर ये क्या हो रहा है अब सुभाष चन्द्र बोस के देश में,
चम्मचा चापलूस बेईमान प्रथम आ रहा हर इक रेस में।
देखो  ये नेता चम्मचागिरी में नया इतिहास बना रहे हैं,
तभी तो घोड़ो को घास न मिले गधें पंजीरी खा रहे हैं।
दफ्तर से फाइलें गायब,भ्रष्टाचार,डालर 63 से भी ऊपर है,
नेता फिर भी दावा कर रहे उनका राज एकदम से सुपर है।
पहले राजनीति में चलता बहन भाई चाचा भतीजा वाद,
मगर अब इन को पीछे छोड़ आगे आ चुके प्यारे दामाद।
लगता भारत में नेता भ्रष्टाचार का ऐसा रिकार्ड बनाये गे,
गुमनाम" दुनिया वाले देख कर दांतों तले ऊँगली दबायेगे। राजेन्द्र रैना गुमनाम 

o bhaiya

 ये भी हो सकता है
 ओ मेरे भईया प्यारे तू राखी के बन्धन को निभाना,
  इस बार न सौ दो सौ लूगी,पांच किलो प्याज ले आना।
  सब्जी को अब मुंह न लगते बिना छोंक के दाल है खाते,
  जो स्वाद दाल हो खानी तो साथ पाँव भर टमाटर लाना। राजेन्द्र रैना गुमनाम
     

सोमवार, 19 अगस्त 2013

rakhi ka tyohar

राखी का त्यौहार,बहन भाई का प्यार,
चार धागों में सिमटा,प्रेम प्यार एतबार।
राखी का त्यौहार। …………………. 
राखी का त्यौहार इसलिए तो खास बहुत,
बहन को भाई पे ही होता है विश्वास बहुत,
राखी ही तो प्रेम प्यार में करती है विस्तार।
राखी का त्यौहार। …………….
राखी ही मन के सागर में उठाती उमंग है,
बहन के मन में भाई के लिए उठती तरंग है,
राखी के दिन बहन को भाई का इन्तजार।
राखी का त्यौहार। …………….
चार धागों का अटूट ये बन्धन टूटता नही,
पवित्र ये रिश्ता हाथ कभी  भी छूटता नही,
देखना बन जाये न पवित्र त्योहार व्यापार।
  राखी का त्यौहार। ……………. राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
सुप्रभात, राखी की शुभ कामनाओ सहित जय जय मां 
दोस्तों सोच समझ ध्यान से पढ़ना अपनी रचना को 

इस ओर उस पार चले,
तेरी ही सरकार चले।
तेरे दम से जहां रोशन,
रहमत तेरी संसार चले।  
मेरे बारे भी सोच करले,
क्यों जीते जी मार चले।
मेहरबानी है मेरी मां की,
जिससे ये घर बाहर चले।
अपने तन पे फटे कपड़े,
कोरे पहन हो तैयार चले 
जीते जी कोई कदर नही,
मरे संग अपने यार चले।
चारागर बेवफा निकला,
मायूस हो के बीमार चले।
उपर से चलती राजनीति,
कब नीचे से भ्रष्टाचार चले। 
पाक समझे कमजोर हमको,
रोज सीमा पे हथियार चले।
तब बरबादी नही है रूकती,
जब वक्त की तलवार चले। 
तेरी बेवफाई का है सदका,
"रैना"हम जिन्दगी हार चले। राजेन्द्र रैना "गुमनाम" 

is apr chle

इस ओर उस पार चले,
तेरी ही तो सरकार चले।
मेरे बारे सोच तू करले,
क्यों जीते जी मार चले।
मेहरबानी है औरत की,
जिससे ये घर बाहर चले।
जीते जी कोई कदर नही,
मरे संग अपने यार चले।
चारागर बेवफा निकला,
मायूस हो के बीमार चले।


रविवार, 18 अगस्त 2013

mahfil ae jjbat

महफ़िल ए जज्बात में आ के तो देख,
सूरत बदल जाये दिल लगा के तो देख।
चिराग बुझाना तो बहुत आसां है यारा,
तू गरीब के घर चिराग जला के तो देख।
ख्वाबों में महल बनाना मुश्किल नही है,
जमीन पे तू इक कमरा बना के तो देख।
दूसरों के घरों पे अक्सर उठाता है उंगली,
अपने घर के अंदर कभी जा के तो देख।
तीर्थ नहाने से न मिलती मन की शांति,
मां बाप के चरणों में सिर झुक के तो देख।  
गुलशन में गुल खिलते हैं तमाम लेकिन,
"रैना"मन का गुलाब तू खिला के तो देख।राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात के साथ इक रचना। … जय जय मां     

शनिवार, 17 अगस्त 2013

aalla waheguru

अल्ला वाहेगुरु ईशा राम राम लिखना,
काश मुझे आ जाये तेरा नाम लिखना।
सीख लिया मैने सब कुछ कुछ न बाकी,
पर आया न अदब दुआ सलाम लिखना।
लिखना ही तो गिजा खुराक है उनकी,
कलम के दीवानों ने तो तमाम लिखना।
बेचारे कुछ ऐसे भी है लिखने वाले यारो,
नेताओं से कहते मेरे नाम इनाम लिखना।
गर मौका मिल जाये उसके बारे लिखने का,
रैना को भटका मुसाफिर गुमनाम लिखना। राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात जी। ……… जय जय मां   

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

दोस्तों आप की अपनी रचना 

अपने अन्दर तलाशता रहता हूं,
खुद में सिकन्दर तलाशता रहता हूं।
मोती पाने की तमन्ना पाल रखी,
इक समुन्दर तलाशता रहता हूं। 
जो दिखाये गा मंजिल का रास्ता,
मैं वो पैगम्बर तलाशता रहता हूं। 
ईमानदारी की वजह मोहताज हूं,
अब अपना चैम्बर तलाशता रहता हूं।
जिधर देखता लगी हैं लम्बी कतारें,
मैं अपना नम्बर तलाशता रहता हूं। 
"रैना"मुफ़्लिस का तुम हाल मत पूछो,
सिर छुपाने को अम्बर तलाशता रहता हूं। राजेन्द्र रैना गुमनाम   
                                            094160 76914 

main usse dur nhi

वो मुझसे दूर नही है मैं भी उसके करीब हूं,
मगर उसे देख नही सकता बड़ा बदनसीब हूं। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी। ……जय जय मां

अपने अन्दर तलाशता रहता हूं,
इक समुन्दर तलाशता रहता हूं,
मोती पाने की तमन्ना पाल रखी,
बेशक वो भी इक इन्सान ही था,
खुद में सिकन्दर तलाशता रहता हूं।
परियों का नाच देखने की हसरत,
खूद में इन्दर तलाशता रहता हूं। 

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

kaise aajadi kiski

15 अगस्त पर विशेष

कैसी आजादी किसकी आजादी कब हुई आजादी,
लोग जश्न मना कर क्यों कर रहे वक्त की बरबादी।
कैसी आजादी किसकी  ……………………. 
गरीब भूखा मर रहा अनाज गोदामों में सड़ रहा है,
कर्जे के बोझ तले दबा किसान आत्महत्या कर रहा है,
आदेश के अभाव में जवान सीमा पर खड़ा डर रहा है,
ये विडम्बना पैदा होते बच्चे के सिर कर्ज चढ़ रहा है,
65 वर्षों बाद भी दहशत में है देश की आधी आबादी।
कैसी आजादी किसकी...................................
जरा गोर से देखो तो सारा सिस्टम ही फेल लगता है,
अब उपर से नीचे तक सिर्फ पैसे का ही खेल लगता है,
इमानदार वफादार के लिये हिंदुस्तान जेल लगता है,
दुष्ट आत्माओं का इस जमीं पर हो रहा मेल लगता है,
अब मसीहा बन रहे चुगल चम्मचें चोर उच्चके शराबी।
कैसी आजादी किसकी ………………………….
सही मायनों में आजाद हुआ विशाल अजगर भ्रष्टाचार,
आजाद हुए रिशवतखोर बेईमान देशद्रोही कपटी गद्दार,
खुली हवा वो साँस ले रहे जिनका नफरत का कारोबार,
देश के जो कट्टर दुश्मन उनके गलों डलते फूलों के हार,
हर बड़े ताले को अब तो खोल रही है भ्रष्टाचार की चाबी।
कैसी आजादी किसकी ………………………….
भारत माता रो रो कर अब अपना दुखड़ा यूं सुनाती है,
मुझको तो आजादी कहीं पर भी अब नजर न आती है
बेरोजगार मायूस बच्चे को देख कर मां आंसू बहाती है,
दूर दूर तक आशा की कोई किरण झलक न दिखाती है,
जनता अब अस्वाशानों के दम से देखती ख्वाब गुलाबी।
कैसी आजादी किसकी ....................राजेन्द्र रैना "गुमनाम "

बुधवार, 14 अगस्त 2013

सभी मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की शुभ कामनाएं

मगर आज लाल किले पर प्रधानमन्त्री
द्वारा दिए भाषण से लगता है ?????
भारत की गाड़ी तो दलदल में धसे गी,
जब प्रधानमन्त्री ही रो रहा है,
फिर जनता कैसे हंसे गी। राजेन्द्र रैना गुमनाम "
सुप्रभात जी। ……………जय जय मां 

jshne aajadi

स्वतन्त्रता दिवस की ख़ुशी मना रहे लोग,
नेता जी हिसाब लगा रहे कितना कमाये गे। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

 दोस्तों नारी जाति को ध्यान में रख कर,
एक कविता लिखी गई है,यदि महिला मित्र चाहे गी
 मैं तभी इसे पोस्ट करु गा।
इस कविता का मुखड़ा लिख रहा हूं. कोमेट्स जरुर करे

       कविता      नारी 
अब उठ री नारी बावली मत न तू श्रृंगार कर,
वक्त है विपरीत खुद को युद्ध के लिए तैयार कर।राजेन्द्र रैना गुमनाम"

neta hota hai

दोस्तों देखिये मेरी  लेखनी का अंदाज

जवान होता सीमा पे मरने के लिये,
नेता होता अपना घर भरने के लिये।
पाकिस्तान है हमला करने के लिये,
भारत के प्रधानमंत्री हैं डरने के लिये।
वाड्रा को लेकर बेवजह मजा है शोर,
दामाद तो होता माल रगड़ने के लिये।
नेता देखिये किस कद्र बदलते हैं रंग,
नीतिश बेताब हाथ पकड़ने के लिये।
लालू की अर्जी तभी ख़ारिज हो गई,
इनाम मिले पशु चारा चरने के लिये।
मुन्नी बाई शीला खूब मशहूर हो गई,
फिल्मों में बचा न कुछ करने के लिये।
बाबा के उपदेश पे जनता करे अमल,
बाबा होते सिर्फ कथा पढ़ने के लिये।
राजनीति में चम्मचागिरी आम बात,
नेता का माथा होता है रगड़ने के लिये।
पढ़ लिख कर डिग्री लिए घूमता गरीब,
पैसे बिना चारा न आगे बढ़ने के लिये।
"गुमनाम"से खफा है तू किसलिए बता,
तू और कितने गम देगा जरने के लिये। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"




रविवार, 11 अगस्त 2013

dil betab hai kisi ko apna

ख्वाबों का हसीन शहर वो सजाने के लिये,
दिल बेताब किसी को अपना बनाने के लिये।
मैंने सुन रखा ये क्या इसमें कुछ सच्चाई है, 
इश्क में दिल होता है सिर्फ जलाने के लिये।
आजकल कल राजे दिल कोई खोलता नही,
ये हंसते दांत होते है फ़कत दिखाने के लिये।
टांगें खींचना टांगें अड़ाना जमाने की फितरत,
हाथ थामता नही अब कोई भी उठाने के लिये।
गुमनाम"समझ ली है हमने कहानी ये,सारी,
सच में अब कुछ भी बचा नही बताने के लिये। राजेन्द्र रैना गुमनाम"













शनिवार, 10 अगस्त 2013

महफ़िल ए जज्बात में हम भी चले आये,
सुना यहां कोई किसी के जज्बातों से खेलता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

insan

"रैना"इन्सान इतना तो सम्भल जाये,
जीते जी दिल की अर्थी न निकल जाये।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
 किसी से दिल मिलाने की देर है,
"रैना"लोग पत्थर मारने लगे गे। राजेन्द्र रैना गुमनाम"


उसको कबूल मेरी फ़रियाद हो,
तेरे ख्वाबों का शहर आबाद हो,
हम तो मांगते है ये दुआ दोस्त,
तुम्हे जन्म दिन मुबारखबाद हो। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

siyastdan

क्या बूढ़ा भी जवान हो सकता है।
क्या खुशहाल हर इन्सां हो सकता है,
तीर मारा है इशारा करके,
हाथ छोड़ा है नकारा करके।
हाल से बेहाल हम है "रैना"
दूर बैठा वो किनारा करके। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

ik ghar id

इक घर ईद,
दुसरे घर तीज,
ये नजारा ????
तो सिर्फ भारत में ???
देखने को मिलता है। गुमनाम"

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

roti bhart mata ko

रोती भारत माता को अब चुप कराने वाला कोई नही,
जख्म देने वाले बहुत महरम लगाने वाला कोई नही।
खद्दरदारी मसीहा अब ठेकेदार बन गये भ्रष्टाचार के,
समस्त ही मां को लुटने वाले बचाने वाला कोई नही।
अपनी अपनी  सब को पड़ी न देश की कोई सोच रहा,
देखो गरीबों को हटा रहे गरीबी हटाने वाला कोई नही।
पढ़ लिख कर भी बेरोजगार युवा आत्महत्या कर रहे,
क्योकि बिन पैसे उनको नौकरी दिलाने वाला कोई नही।
बेमौत अब सैनिक मरते उनके परिवार जन बिलख रहे,
बैरी का मुंह तोड़े ऐसी हिम्मत दिखाने वाला कोई नही।
अंग्रेजों के चम्मचें सिर्फ चम्मचागिरी ही पसन्द करते हैं,
भगवान के सिवा अब भारत को बचाने वाला कोई नही। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

hal mere dil

दोस्तों आज की ग़ज़ल आप के नाम

दर्द मेरे दिल का जानते नही,
दिन बुरे आये पहचानते नही।
ये मसीहा क्यों समझते नही,
भूत लातों के यूं मानते नही।
यार ने मयकश तो बना दिया,
मेरे बारे क्यों अब सोचते नही। 
दिल लगाना एक से अदा मेरी,
ख़ाक दर दर की हम छानते नही
झूठ से नफ़रत सच के करीब हैं, 

सूत से शामियाने तानते नही।
हद असूलों में है जिन्दगी बंधी,
रैन" सीमा को हम लांघते नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

 
अपने लिखने का अन्दाज कुछ ऐसा है,
दिल की बात कहते है कलम के मार्फत। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

कुत्तों के भौकने की परवाह नही करते,
गुजर जाते जिस गली से गुजरना होता। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

बाज आ जा पाकिस्तान????? 
अपनी हरकत से?????
वरना तुझे बुरी तरह तोड़े गे?????
बंगला देश की तरह??????
अलग बलोचिस्तान बना के छोड़े गे। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

बुधवार, 7 अगस्त 2013

pakistani

दोस्तों के लिए मौजूदा दौर ध्यान में रख
खास अंदाज

अपना स्वाभिमान भी खोना पड़ता है,
 मसीहा बुझदिल हो तो रोना पड़ता है।
 राजा भूल जाये जब फर्ज धर्म अपना,
 फिर जनता को खाली पेट सोना पड़ता है।
 सावन के महीने में तो रोते होगे सभी,
 हमें आषाढ़ में दिल भिगोना पड़ता है।
 चम्मचागिरी से राज काज नही चलता,
 जनता का बोझ पीठ पे ढोना पड़ता है।
 सोनिया से शान से कह रहे मनमोहन,
चीन का बड़ा ही सस्ता खिलौना पड़ता है।
 देश का बच्चा बच्चा अब कहने लगा है,
 खून का दाग खून से ही धोना पड़ता है।
 गुमनाम" तू जान ले सत्य है ये कथन,
बेशर्म के साथ तो बेशर्म ही होना पड़ता है। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
   

मंगलवार, 6 अगस्त 2013

पत्रकार ने कांग्रेस के महान नेता दिग्गविजय से पूछा
पत्रकार-नेता जी भारतीय चौकी पर पाकिस्तानी सेना के
 हमले बारे आप का क्या ख्याल है।
दिग्गविजय-मेरे ख्याल में ये हमला सौ प्रतिशत फर्जी है।
पाकिस्तान को बेवजह बली का बकरा बनाया जा रहा है।
इस पर कांग्रेस प्रवक्ता अल्वी जी का जवाब
दिग्ग विजय जी का ये अपना मत है, हमारे हिसाब से मामले
की जाँच करवाई जाये।
वैसे प्रधानमन्त्री साफ कर चुके है नवाज शरीफ को खाने पर बुला कर
इस बारे पूछे गे.……… राजेन्द्र रैना गुमनाम"
दोस्तों ?????
बहादूर आईए एस दुर्गा शक्ति नागपाल के सम्मान में
 कुछ लिखना लिख रहा हूं आप का समर्थन चाहिए।

ओ दुर्गा तुझे सलाम,ओ दुर्गा तुझे सलाम,
मुलायम,अखिलेष की तूने कर दी नींद हराम।
ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
वफा ईमानदारी की तू मिसाल है,
तेरा अन्दाज तो निडर बाकमाल है,
मर्द घबराये नारी ने कर दिया वो काम।
 ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
खनन माफियों के छक्के छुड़ा दिये,
बड़े बड़े रसूकदार थाने में बैठा दिये,
अपने फर्ज को बखूबी दिया तूने अंजाम।
ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
देश में बेईमानों के चाहे लम्बे हाथ हैं,
इमानदार भारतीय सारे ही तेरे साथ हैं,
गद्दारों को ऐसे ही तू कर देना तमाम।
ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
मां आदि शक्ति बलशाली का तू अंश है,
भ्रष्टाचारियों का तूने करना विध्वंश है,
"रैना"मन से तेरे चरणों में करता है प्रणाम।
 ओ दुर्गा तुझे सलाम,………… राजेन्द्र रैना गुमनाम"


bhart mata baithhi

दुखी मन से लिखी रचना

भारत माता अपने हाल पे सुबक सुबक के रोती है,
सोचती बेशर्मी और बुझदिली की कोई हद होती है।
चीन सीमा में घुसता,पाकिस्तान बेख़ौफ़ दहाड़ता है,
वो सरेआम जवानों को तड़फा तड़फा कर मारता है।
कभी कभी पाकिस्तान ऐसा भी साहस दिखलाता है,
जवानों की गर्दन ही उतार कर अपने साथ ले जाता है।
मगर हमारे नेता चिकने घड़ों को कोई फर्क नही पड़ता,
क्योकि बार्डर पर इनका कोई अपना जो नही है मरता।
गिरगट घटना के बाद मेंढक बन टर टर करने लगते हैं,
शहीदों के घर झूठे आश्वासनों से जम कर भरने लगते हैं।
काश कोई सुभाष चन्द्र बोस जैसा स्वाभिमानी नेता आये,
जो धोखेबाज पाकिस्तानियों की होश को ठिकाने लगाये।
क्योकि मनमोहन सिंह जी तो अपना फर्ज ऐसे निभाते है,
पड़ोसी देशों की धमकी सुन सोनिया की गोद में छुप जाते है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"  

सोमवार, 5 अगस्त 2013

wah kya khub

दोस्तों इसे भी देखे प्यार से

वाह क्या खूब अन्दाज उनके,
नाक पे मख्खी नही बैठने देते।
हो गये है खफा हम से इस कद्र,
अब हमारा नाम भी तो नही लेते।
गुस्ताखी हो गई इक बार हमसे,
मेरे कुचे में ही आना छोड़ दिया,
तरस आया नही मेरे इस हाल पे,
गुंचे के मान्निद दिल तोड़ दिया।
ऐ खुदा हम तुझसे ये अर्ज करते है,
तू ही उन्हें बता हम उन पे मरते है। राजेन्द्र रैना"गुमनाम"  

रविवार, 4 अगस्त 2013

sath rhta magr bolta nhi

साथ रहता पर बोलता नही,
राज दिल के क्यों खोलता नही।
चेहरे से चिलमन हटा कभी,
आंख भर के क्यों देखता नही।
यूं कहे तुझसे मैं जुदा नही,
पास मेरे तू बैठता नही।
बात "रैना" की मान ले कभी,
बिन तिरे जीवन महकता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी.…………जय जय मां ।


dosti to hai

दोस्तों देखना ये रचना कहां तक सही है

दोस्ती तो है मगर किताबों में,
तंगी में दोस्त मिलते ख्वाबों में।
इस जमाने ने अब तौर बदला,
दोस्ती घुल मिल गई शराबों में।
कृष्ण से पूछता सुदामा क्यों अब,
दोस्ती का फूल न खिले बागों में।
जो दोस्ती की चमक बराबर रखे,
उल्फत का तेल न इन चिरागों में।
रैना"मत कर अब दोस्ती की बातें,
खो जा फिर से उन पुरानी यादों में। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

    

dosti ki bqate

दोस्ती दिवस पर खास पेशकश

मत कहना मेहर रब की है,
दोस्ती तो अब मतलब की है।
कृष्ण सुदामा की वो दोस्ती,
मुद्दत पहले बातें तब की है।
शिकवा करना है कब वाजिव,
धोखा दे फितरत सब की है।
दिन रैना दोस्त बदले तेवर,
ये चिकनी मिट्टी अब की है।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
 
 

शनिवार, 3 अगस्त 2013

ye bta mai tujhe

रविवार विशेष ग़ज़ल दोस्तों के लिए

ये बता मैं तुझे यूं भुलाऊ कैसे,
जिन्दगी को नरक अब बनाऊ कैसे।
चश्म में अक्स तेरा बसे तू दिल में
याद तेरी यहां से हटाऊ कैसे।
बिन तिरे हर तरफ है दरद तन्हाई,
बेदर्द मौत खुद को बचाऊ कैसे।
दोस्तों से गिला हम करे भी तो क्या,
हाल दिल का किसी को सुनाऊ कैसे।
अब मसीहा नही है भरोसे काबिल,
आइना भेडियों को दिखाऊ कैसे
सोचता रैन" दिन हर घड़ी हरपल मैं,
दाग दिल पे लगे अब मिटाऊ कैसे। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"  

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

aakhir kya teri

दोस्तों यार को समर्पित ये ग़ज़ल

आखिर क्या वो मजबूरी है,
हमसे क्यों इतनी दूरी है।
हम मुफ़्लिस दीवाने तेरे,
तू दानी की मशहूरी है।
क्या बरपा तेरी बस्ती में,
हर मुखड़ा अब बेनूरी है।   
खाने दे मुझको जी भर के,
मां के हाथों की चूरी है।
रैना"सोचे दिन कब निकले,
जिंदगी हो जाती पूरी है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी  …  जय जय मां  

bismal

दोस्तों के नाम छोटी बहर की ग़ज़ल

बिस्मिल मिरा ये दिल,
जीना हुआ मुश्किल।
वो जान का दुश्मन,
है गाल पे जो तिल।
यूं देख कर हालत,
खिल खिल हंसे कातिल।
वो दरद आहें आंसू,
है इश्क में हासिल।
मझदार में भटके,
है दूर वो साहिल।
गर चाह कुरसी की,
"गुमनाम" हो जाहिल। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"