रविवार, 3 मई 2015

दोस्तों की नजर गज़ल
मात्रा =16 ( 2 2 2 2 2 2 2 2 )
रुतबा तब ही हासिल होगा,
तप तप के तू काबिल होगा।
गैरों से तू मत घबराना,
कोई अपना कातिल होगा।
बूढ़ों को दुःख देने वाला,
बेशक कोई जाहिल होगा। 
उसकी मस्ती तब ही चढ़ती,
जब दीवाना पागल होगा।
अक्सर करता तौबा तौबा,
रैना"का दिल बिस्मिल होगा।
बिस्मिल=जख्मी  

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