शनिवार, 9 मई 2015

मातृ दिवस पर माँ को समर्पित रचना
मैं बताता हूं माँ कैसी है,
एकदम रब के जैसी है।
निश्छल निश्भाव जैसे पानी रमता,
बिल्कुल ऐसी होती माँ की ममता।
माँ कहती नही कुछ चुप रह जाती है,
धरती के जैसे सारे दुःख सह जाती है।
सूरज की किरण जैसे अँधेरा मिटाती है,
ऐसे ही माँ रोशन जहान दिखाती है।
जीवन दानी जिस प्रकार हवा होती,
ऐसी ही वरदानी माँ की दुआ होती।
अर्श खुशियों की वर्षा से धरा को भिगोता  है,
ऐसे ही माँ का विशाल हृदय होता है।
ताउम्र कानों में कोयल सी गुनगुनाती है,
माँ कभी बच्चों से दूर न जाती है।
रैना"इसलिये कभी न घबराया है,
अक्सर मेरी माँ ने हौसला बढ़ाया है। रैना" 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें