sufi tadka
शुक्रवार, 1 मई 2015
जख्म खाकर भी मुस्करायेगी किरण,
लफ्जों से चमन को महकायेंगी किरण,
बेशक अब तो किरण कविता हो गई है,
सारी दुनिया में परचम फहरायेगी किरण। रैना"
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