सूरज भी रोशनी के लिये तरसता है,
बीच चौराहे खड़ा छम छम बरसता है,
मेरे देश की हालत कुछ ऐसी ही हो गई,
मुर्गमसल्म खाता कोई भूखा तड़फता है।रैना"
हमारी सोच का पूरी तरह बेड़ा गर्क है
तभी यहां आदमी आदमी में बड़ा फर्क है,
कहने को तो भारत देश देवों की धरती,
लेकिन नेताओं ने बनाया बदतर नरक है।
बीच चौराहे खड़ा छम छम बरसता है,
मेरे देश की हालत कुछ ऐसी ही हो गई,
मुर्गमसल्म खाता कोई भूखा तड़फता है।रैना"
हमारी सोच का पूरी तरह बेड़ा गर्क है
तभी यहां आदमी आदमी में बड़ा फर्क है,
कहने को तो भारत देश देवों की धरती,
लेकिन नेताओं ने बनाया बदतर नरक है।
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