युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच ने वो कर दिखाया है,
रैना"जैसे इक जरे को आफ़ताब सा चमकाया है।
इस वीरां गुलशन को नसीब न हुई थी बहार कभी,
लेकिन इस ग्रुप के एडमिन ने चमन महकाया है।
सच कहता हूँ मैं बदकिस्मत कलम का पुजारी,
मेरे जीवन में ये हसीं मौका पहली बार ही आया है।
फले फुले खुश रहे इस मंच के मेम्बर जन सारे,
सूफी रैना"ने दुआ मांगी दिल से ये फ़रमाया है। रैना"
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