बड़ा फ़िरागे दिल वो मेरा यार है,
बेमुरब्बत मैं उसे मुझसे प्यार है।
मैंने कसमें वादें तोड़े तमाम हैं,
उसको फिर भी मेरा इन्तजार है।
नजरे कर्म है करता बरसे रहमतें,
उस पे शक मैं करता न एतबार है।
उनसे दिल लगाया जो मेरे दुश्मन,
रिश्तों को हमने किया तार तार है।
धर्म कर्म की बातें अच्छी लगे किताबों में,
बेमुरब्बत मैं उसे मुझसे प्यार है।
मैंने कसमें वादें तोड़े तमाम हैं,
उसको फिर भी मेरा इन्तजार है।
नजरे कर्म है करता बरसे रहमतें,
उस पे शक मैं करता न एतबार है।
उनसे दिल लगाया जो मेरे दुश्मन,
रिश्तों को हमने किया तार तार है।
धर्म कर्म की बातें अच्छी लगे किताबों में,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें