sufi tadka
सोमवार, 4 मई 2015
तीन दिन की कहानी ये जिंदगानी,
जानते हुये भी न किसी ने जानी।
बचपन में भुला जवानी में नादानी,
बुढ़ापे में रोया हो गई खत्म कहानी। रैना"
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