मंगलवार, 5 मई 2015



अच्छे दिन आने के वादे हाये किधर गये,
एक साल होने से पहले ही सारे बिखर गये। 





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अच्छे दिन आने की तलाश अधूरी रह गई,
जनता के हिस्से में फिर मजबूरी रह गई।
हर खाते में 15 लाख आने है स्विट्जरलैंड से,
ताला खोलने वाली बस चांबी जरूरी रह गई। रैना"

15 लाख मिलने की आस अधूरी रह गई,
आयेगे दिन बहार के मचाया शोर था,
अब रो रही जनता प्यास अधूरी रह गई।
भाषण के रथ पे चढ़ किला जीत लिया,
वन रैंक वन पैंशन देने का किया वादा,
फौजी कहते बात खास अधूरी रह गई। 

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