जिंदगी का गीत जिसे गाना आ गया,
कदमों में उसके तो जमाना आ गया।
हर दिल उस पर हो जायेगा फ़िदा,
घरे मिटटी जिसको सजाना आ गया।
उसके लिये ही खुला हर दरवाजा,
काम कर जिसको दिखाना आ गया।
मायूस वो तो कभी होगा न उदास,
जिसे खुद औरों को हंसाना आ गया।
इस दौर में उसे मिलती कामयाबी,
जिसको परख़ शिकार फ़साने आ गया।
रैना" की जिन्दगी तो फ़टा ढोल सा,
मजबूरी में इसे भी बजाना आ गया। रैना"
कदमों में उसके तो जमाना आ गया।
हर दिल उस पर हो जायेगा फ़िदा,
घरे मिटटी जिसको सजाना आ गया।
उसके लिये ही खुला हर दरवाजा,
काम कर जिसको दिखाना आ गया।
मायूस वो तो कभी होगा न उदास,
जिसे खुद औरों को हंसाना आ गया।
इस दौर में उसे मिलती कामयाबी,
जिसको परख़ शिकार फ़साने आ गया।
रैना" की जिन्दगी तो फ़टा ढोल सा,
मजबूरी में इसे भी बजाना आ गया। रैना"
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