मेरी क्या औकात जो मैं हालात बदल सकता,
गिरना मेरा नसीब था फिर कैसे संभल सकता,
रहना था मुझको तेरे कदमों की ठोकरों में ही,
रैना" फिर भला कैसे तुझसे दूर निकल सकता। रैना"
गर्दिश के दिन जब आया करते है,
जानने वाले अनजान बन जाया करते है। रैना"
गिरना मेरा नसीब था फिर कैसे संभल सकता,
रहना था मुझको तेरे कदमों की ठोकरों में ही,
रैना" फिर भला कैसे तुझसे दूर निकल सकता। रैना"
गर्दिश के दिन जब आया करते है,
जानने वाले अनजान बन जाया करते है। रैना"
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