sufi tadka
रविवार, 3 मई 2015
दिल का टूटना अब आम हो गया,
हुस्न कहीं इश्क बदनाम हो गया।
आँखों से हुस्न ने पिलानी छोड़ दी,
इश्क की पसन्द अब जाम हो गया। रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें