सोमवार, 4 मई 2015

तेरे दर्शन को मेरी माता भटक रहा जमाना है,
कैसे होगे माँ तेरे दर्शन न भेद किसी ने जाना है,
रैना" भी तेरा पुजारी तेरे दर्शन का अभिलाषी है,
वैष्णो माँ ये बतला मैंने क्या वो फर्ज निभाना है।
अभिलाषी भक्त खड़े तेरे दर पे  कर उपकार मेरी माँ,
सिवा इसके न हसरत हमारी करने दीदार मेरी माँ।   रैना"

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