टूट के प्यार करने की जिद्द है,
तेरा दीदार करने की जिद्द है।
रुख से पर्दा हटा लो सनम,
आंखें चार करने की जिद्द है।
सजन को मिलने के खातिर,
दरिया पार करने की जिद्द है।
दिल के वीरान गुलशन को,
गुले गुलजार करने की जिद्द है।
खुद पे तो भरोसा नही रैना"
उस पे एतबार करने की जिद्द है। रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें